मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 15 अगस्त के दिन नए जिलों की घोषणा की। मोहला-मानपुर को नए जिले के रूप में विकसित करने की घोषणा के साथ ही विरोध भी शुरू हो गया। अंबागढ़ चौकी क्षेत्र के रहवासी चौकी को ही जिला मुख्यालय बनाने की मांग कर सड़क पर उतर आए।
इधर विरोध के स्वर उठते ही दूसरे दिन मुख्यमंत्री ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की तर्ज पर जिले का नाम बदलकर मानपुर-मोहला-चौकी जिला रखने की घोषणा सोमवार की शाम कर दी है। यानी की इसे एमएमसी जिला कहा जाएगा। इस घोषणा के साथ ही प्रशासनिक हलचल तेज हुई है तो वहीं राजनीति में भी नए समीकरण बनने के आसार नजर आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से ही मानपुर, मोहला क्षेत्र को जिला घोषित करने की मांग उठ रही थी।
10 से 15 बार जिले की मांग को लेकर आंदोलन हो चुके हैं। जिले की घोषणा से वनांचल के रहवासियों को बड़ी राहत मिली है। अब वनांचल के रहवासियों को हर काम के लिए मुख्यालय तक 160 किलोमीटर का लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा। इस क्षेत्र के रहवासियों की सबसे बड़ी समस्या यही थी कि इन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर प्रशासनिक कामकाज के लिए राजनांदगांव तक लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष नवाज खान सहित एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री बघेल से मुलाकात की।
नक्सल प्रभावित नए जिले में इस तरह की चुनौतियां
1. नक्सलवाद- नया जिला नक्सल प्रभावित है। गांवों में नक्सलियों की आवाजाही बनी रहती है। इस वजह से क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा है। कुछ गांव तो नक्सल मामले में अतिसंवेदनशील है।
2. स्वास्थ्य- इलाज की बेहतर सुविधा नहीं मिल पाती। सुविधायुक्त अस्पताल ही नहीं है। प्रायमरी ट्रीटमेंट के बाद मरीजों को बेहतर इलाज के लिए 100 से 160 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।
3. कनेक्टिविटी- ज्यादातर गांवों में पक्की सड़कें नहीं हैं। ग्रामीण मुख्यालय से कटे रहते हैं। मानपुर क्षेत्र के 17 गांव बिजली विहीन है। सौर ऊर्जा के सहारे गांव रोशन होते हैं। बारिश के दिनों में पहुंच पाना मुश्किल होता है।
4. एजुकेशन- शिक्षा के बड़े संस्थान नहीं है। इसलिए वनांचल के युवाओं को बेहतर शिक्षा के लिए राजनांदगांव या फिर दूसरे बड़े शहरों की ओर रूख करना पड़ता है।
ऐसी खासियत, जो विकास में निभाएगी अहम भूमिका
1. भरपूर लौह अयस्क- नए जिले में आयरन ओर की तीन खदानें संचालित हैं। गोदावारी, सारड़ा और दुलकी माइंस में भरपूर लौह अयस्क है। यानी की तीनों खदान क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। तीनों माइंस से ही बड़ा राजस्व सामने आएगा।
2. वनोपज- मानपुर क्षेत्र वनाच्छादित है। यहां पर वनोपज की बाहुलता है। इस क्षेत्र में तेंदू, चार सहित महुआ का उत्पादन अधिक होता है। इस क्षेत्र का तेंदूपत्ता विशेष डिमांड पर बाहर भेजा जाता है। बाहर के व्यापारी नाम से ही यहां का तेंदूपत्ता खरीदते हैं।
3. पर्यटन- वनांचल के भीतरी गांवों में पर्यटन की बेहद संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में कई पुराने तीर्थ स्थल हैं। जंगल होने से प्राकृतिक सौंदर्य से क्षेत्र भरपूर है। इसलिए यहां पर्यटन क्षेत्र डवलप करने से आय के स्रोत बढ़ेंगे। इससे नए जिले का तेजी से विकास संभव हो पाएगा।
9 घंटे रहा स्टेट हाईवे पर चक्काजाम, नगर भी बंद
अंबागढ़ चौकी| नए जिले के गठन व अंबागढ़ चौकी का नाम शामिल नहीं होने के बाद नगर में रविवार को नगर स्वस्फूर्त बंद हो गया। लोगों ने स्टेट हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। अंबागढ़ चौकी को जिला बनाने की मांग को लेकर नगरवासियों ने जिला निर्माण संघर्ष मोर्चा व नागरिक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले नगर बंद व चक्काजाम किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई। कांग्रेस के विधायक ने समझाइश दी।
ऐसी है भौगोलिक स्थिति: इस जिले में तीन ब्लॉक शामिल होंगे। मानपुर, मोहला और अंबागढ़ चौकी। औंधी के बाद से महाराष्ट्र और पखांजूर से सटा हुआ एरिया इस जिले में शामिल होगा। कांकेर जिला भी सटा हुआ है। वहीं शेरपाल गांव की ओर से बालोद जिला लगा हुआ है। लगभग साढ़े 3 लाख की आबादी इस नए जिले की है। बॉर्डर से लगे गांवों की कनेक्टिविटी महाराष्ट्र से ज्यादा है।
राजनीतिक समीकरण बदलेंगे: नए जिले की घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों की ओर से जिला स्तर पर नई जिम्मेदारी देने की भी तैयारी शुरू हो गई है। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य दलों में मानपुर, मोहला, चौकी जिला अध्यक्ष को लेकर हलचल शुरू हो गई है। संसदीय सचिव एवं विधायक इंदरशाह मंडावी ने बताया कि जिला बनाए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
