राजनांदगाँव, आदिवासी कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष एवं रेवाडीह वार्ड के आदिवासी पार्षद गामेन्द्र नेताम ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि आदिवासियों को उनका हक और सम्मान दिलाने उनकी समस्याओं का निराकरण करने, भाषा, संस्कृति और इतिहास के संरक्षण के लिए संयुक्तराष्ट्र संघ ने ९ अगस्त १९९४ को विश्व आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया है तब से दुनिया में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति, आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है यह कि जनजाति कला एवं संस्कृति अनमोल है राज्य की कुल आबादी का लगभग ३२ प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समाज का है आदिवासी शब्द दो शब्दों आदि और वासी से मिलकर बना है और इसका मूल अर्थ मूल निवासी होता है। आदिवासी समुदाय का जीवन जल, जंगल, जमीन और प्रकृति से जुड़ा है। आदिवासी समाज समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। आदिवासी समाज आज हर क्षेत्र शिक्षा, ज्ञान, विज्ञान कला संस्कृति में तेजी से तरक्की कर रहा है। देश विदेश के विकास में आदिवासी समाज की भागीदारी बड़ी है। नेताम जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश और देश को समृद्धि व खुशहाली की राह में ले जाने के दिशा में आदिवासी समाज अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता देता रहा है और देते रहेगा उन्होने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज की निरंतर प्रगति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की है।
