शिक्षा विभाग में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया था जब तत्कालीन डीईओ हेमंत उपाध्याय अचानक दफ्तर पहुंचे और डीईओ के चेंबर में रखी कुर्सी को अपने साथ ले जाने की बात कही। उपाध्याय ने वर्तमान डीईओ को बताया कि कुर्सी की खरीदी स्वयं के पैसे से की थी। इसलिए साथ ले जा रहे हैं।
चेंबर में रखे स्वामी विवेकानंद का पोस्टर और कुछ किताबों को भी समेट ले गए। वहीं उपाध्याय ने सरकारी वाहन को भी वर्तमान डीईओ को हैंडओवर कर दिया। जिले में लंबे समय तक दो डीईओ को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई थी। राज्य सरकार की ओर से हेमंत उपाध्याय को दूसरी जगह रिलीव किए बगैर ही एचआर सोम को डीईओ बना दिया था। खींचतान चल रही थी। तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश के बाद डीईओ सोम ने प्रभार संभाल लिया था।
कोर्ट चले गए थे
दो डीईओ का मामला उलझने पर तत्कालीन डीईओ उपाध्याय कोर्ट चले गए। वहां से यथास्थिति बनाए रखने संबंधित आदेश भी आया पर पूरा प्रभार सोम को सौंप दिया गया था। कोर्ट के आदेश के मद्देनजर तत्कालीन डीईओ उपाध्याय ने सरकारी वाहन को अपने पास रखा था। वहीं गुरुवार को अचानक दफ्तर पहुंचे।
यह मेरी पर्सनल कुर्सी है
तत्कालीन डीईओ उपाध्याय ने बताया कि शारीरिक तकलीफ होने के कारण आर्थोपेडिक कुर्सी बनवाई गई है, जिसे दफ्तर में रखा था। अब जरूरत पड़ रही है तो वापस लेने आया था। बताया कि सरकारी वाहन को भी विभाग को सौंपा गया है। बताया गया कि तत्कालीन डीईओ दुर्ग संभागीय कार्यालय में पदस्थ हैं।
