हाईटेक सट्टा का अवैध कारोबार जिले में फलफूल रहा था। बुधवार को इस गिरोह के भंडाफोड़ हुआ है। मामले में स्मृतिनगर पुलिस ने गिरोह के दो एजेंट साकेत नगर दुर्ग निवासी अतुल पटेल और कोरबा के तेजस पांडेय के साथ कारोबार को मैनेजर के रूप में ऑपरेट करने वाले बिहार निवासी अश्विन पांडेय को गिरफ्तार किया है। बुधवार की सुबह तीनों आरोपी पकड़े गए। इस मामले में रैकेट के दुबई कनेक्शन की भी बात सामने आई है।
अश्विनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी कर चुका है। जबकि तेजस और अतुल इंजीनियरिंग के सेकंड ईयर छात्र हैं। पिछले तीन महीने से गिरोह ने ऑनलाइन सट्टा का कारोबार ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस ने साकेत नगर स्थित मकान से लैपटाप, चार मोबाइल, वाइफाई राउटर और अन्य दस्तावेज जब्त किया है। तीनों के ऑनलाइन पेमेंट वॉलेट में 2.38 लाख रुपए मिले हैं। तीनों मोबाइल एप कैरी 777 के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा खिला रहे थे। गिरोह का मास्टर माइंड जितेंद्र पंडित उर्फ काली फरार है। आश्विनी ने ही बाकी दोनों आरोपियों को 12 हजार रुपए सैलेरी में जॉब पर रखा था। पुलिस को तीनों से 28 हजार लोगों से जुड़ी आईडी की जानकारी मिली है। इनमें 14 हजार आईडी के जरिए भारत और इंग्लैंड के बीच शुरू होने वाले टेस्ट मैच और इंडियन महिला हॉकी के जीत-हार पर सट्टा लगाया जा रहा था।
बाकी 14 हजार आईडी लूडो, तीन पत्ती समेत अन्य ऑनलाइन गेम के लिए उपयोग में लाए जा रहे थे। इससे साफ हो गया है कि अश्विनी को छोड़कर जितेंद्र ने अपने मैनेजर के जरिए करीब 50 हजार लोगों को ऑनलाइन सट्टा खेलने के लिए आईडी क्रिएट करके दी है। इससे आशंका है कि ऑनलाइन सट्टा के जरिए प्रतिदिन तीन करोड़ रुपए का लेनदेन किया जा रहा है। पुलिस ने तीनों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस सॉफ्टवेयर बनाने वाले मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है। शहर के कई हिस्सों में सक्रिय सटोरिए : छावनी इलाके में इमरान, नेहरु नगर में बलजीत, वैशाली नगर में नियाज जैसे सटोरिए भी पहले पकड़े जा चुके हैं।
ऐसे मिलती है सटोरियों को आईडी, जानिए
इंजीनियरिंग छात्रों ने पुलिस को बताया कि ग्राहकों को आईडी लेने से पहले जितेंद्र से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क करना पड़ता है। जितेंद्र के ग्रुप को ज्वाइन करते ही ग्राहकों के पास इंस्टेंट मैसेज एप्लीकेशन पर एक लिंक आ जाती है। इसके बाद जितेंद्र सीधे ग्राहकों से बातचीत करता है। दाव लगाने के लिए जितेंद्र के अकाउंट में ऑनलाइन पैसा डिपॉजिट करता है। इसके बाद जितेंद्र दोबारा एक लिंक बनाकर ग्राहक को सोशल मीडिया पर भेजता है। इस लिंक पर क्लिक करते ही ग्राहक मोबाइल एप पर लॉगइन और पासवर्ड के माध्यम से ज्वाइन कर लेता है। यहां पर वह अपने हिसाब से खेल में दाव लगाता है। जीतने के बाद जितेंद्र सीधे ग्राहक के खाते में पैसा ट्रांसफर कर देता हैं। जितेंद्र ने इनफिनिटी ऑनलाइन ग्रुप नाम से सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाया है। हारने के बाद ग्राहक अपनी आईडी को पैसा जमा करवाकर टॉपअप करवाता है। इसके बाद भी वह दोबारा दाव लगा सकता है।
ऑनलाइन सट्टे के ये सॉफ्टवेयर बाजार में आसानी से उपलब्ध हो रहे..
डायमंड, लोटर, जी एक्सचेंज, 777 एक्सचेंज, प्रविड एक्स, सेबेक्स, मैच बॉक्स 9, बेड एक्सचेंज, लोटस और आईओ जैसे हजारों साइट्सहैजो सट्टे के लिए सॉफ्टवेयर के तौर पर उपयोग किए जाते हैं। यहीं नहीं हजारों मोबाइल एप्लीकेशन ऐसे है,जिनमें आईपीएल के मैच की एक-एक बॉल से लेकर तीन पत्ती का दाव लगाया जाता है। चुनाव के दौरान भी ऑनलाइन सटोरियों एक्टिव रहते हैं। आईपीएल क्रिकेट, देश विदेश में होने वाले फुटबाल, टेनिस व अन्य खेलों मेंं भी सट्टा लगाया जाता है और पैसा ऑनलाइन अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता हैं।
मोबाइल पर सट्टा हो गया आसान सायबर सेल ने पकड़ा पूरा मामला
ऐसे सट्टे की साइट में लोगों को यह फायदा है कि मोबाइल पर अपडेट देखा जा सकता हैं। जीतने हारने पर पैसा सीधे वॉलेट से काटा और जमा किया जाता है। यह सब हाईटेक सॉफ्टेवयर का कमाल है। छोटे बड़े सभी सटोरिए इसी का फायदा उठाकर पुलिस को चकमा देते हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ मामूली धाराएं लगाई जाती है। लिखापढ़ी के बाद थाने से मुचलके पर छोड़ दिया जाता है। जिसके कारण भी सटोरियों के हौसले बुलंद रहते हैं। साइयबर सेल ने इस पर नजर रखी और कार्रवाई की।
बनाए जाने वाली आईडी के बारे में भी जानिए
एप्लीकेशन पर लॉग इन करने के लिए एक यूनिक नाम या नंबर के साथ पासवर्ड मिलता है। इस यूनिक आईडेंटिटी और पासवर्ड के जरिए ही ग्राहक मोबाइल एप पर इंट्री कर सकता है। एप मोबाइल और कम्प्यूटर पर चलाने की सुविधा रहती हैं। ग्राहक के पसंद के मुताबिक उसके पास नोटिफिकेशन भी मिलता रहता है। सरल भाषा में समझे तो हाईटेक सट्टा खेलने के लिए एप्लीकेशन पर इंट्री के लिए लॉगइन पासवर्ड को आईडी कहा जाता हैं। फरार सटोरिया जितेंद्र पंडित उर्फ काली ने करीब 50 हजार लोगों को आईडी मुहैया कराई हैं। जिसके माध्यम से लोग ऑनलाइन सट्टे के खेल में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करते हैं। पुलिस को शंका है कि शहर में प्रतिदिन 1 करोड़ का ऑनलाइन सट्टा संचालित हो रहा हैं।
3 की गिरफ्तारी हुई, अन्य सभी जल्द पकड़े जाएंगे
^सायबर और स्मृति नागर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे का कारोबार करने वाले गिरोह के 3 सदस्यों को पकड़ा है। आशंका है कि गिरोह ने 50 हजार लोगों को आईडी दी है। जिसके माध्यम से 3 करोड़ का अवैध व्यवसाय हो रहा है। गिरोह में शामिल और कई नाम सामने आए है। जिनकी तलाश की जा रही है। गिरोह का दुबई कनेक्शन भी चेक किया जा रहा है।
संजय ध्रुव, एएसपी सिटी दुर्ग
