स्थानीय भाषा में लघु वीडियो व ऑडियो के माध्यम से लोगों को किया जाएगा जागरुक
राजनांदगांव। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं में सुपोषण के लिए जिले में विभिन्न स्तरों पर व्यापक प्रयास किए जाएंगे। इसके अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों व पोषण वाटिकाओं में मुनगा का पौधारोपण, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिनों को प्रशिक्षण तथा बच्चों की मानिटरिंग के लिए हेल्थ कार्ड बनाया जाना प्रमुख हैं।
बच्चों में सुपोषण हेतु वर्तमान में विशेषकर जिले के मानपुर और मोहला विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सघन सुपोषण अभियान चलाया जा रहा है। आने वाले दिनों में स्थानीय भाषा में लघु वीडियो व ऑडियो के माध्यम से भी सुपोषण संबंधी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में शिशुरोग विशेषज्ञ, एम्स रायपुर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के मध्य व्यापक विचार-विमर्श भी किया गया है। इस चर्चा के दौरान राजनांदगांव कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा, कुपोषण को दूर करने के लिए जिले के जनसामान्य में पोषण जागरूकता लाने की जरूरत है और यह कार्य अभिभावकों एवं सामुदायिक सहभागिता के साथ किया जाएगा। सुपोषण के लिए विशेषज्ञों के सुझावों को प्रमुखता से शामिल करते हुए रणनीति बनाई जाएगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व मितानिनों को प्रशिक्षित किया जाएगा। वहीं कुपोषित बच्चों, एनीमिक महिलाओं एवं किशोरियों का चिन्हांकन कर उनके सुपोषण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा, मुनगा पौष्टिक तत्वों से भरपूर है इसलिए सभी आंगनवाड़ी केंद्रों एवं पोषण वाटिकाओं में मुनगा के पौधे लगाए जाएंगे।
चर्चा में पद्मश्री डॉ. पुखराज बाफना ने कुपोषण के कारणों की जानकारी देते हुए कहा, कुपोषण की शुरुआत किशोरियों से होती है। इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। वहीं एम्स रायपुर के डॉ. गोयल ने स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करने व पोषण पुनर्वास केंद्र के उन्नयन के बारे में बताया, जिससे बच्चों की निगरानी व स्वास्थ्य सुधार में मदद मिलेगी।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया जिले में सुपोषण के लिए कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा द्वारा विभिन्न आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं जिसके अंतर्गत जिले में कुपोषित बच्चों की पहचान की जाएगी। इस क्रम में बच्चों की स्क्रीनिंग कराई जाएगी तथा कुपोषित पाए जाने की स्थिति में चिन्हित बच्चे के सुपोषण का प्रयास किया जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन डोर-टू-डोर संपर्क कर प्रतिदिन उनके आहारए दवाइयां व स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेंगी। कलेक्टर ने प्रत्येक बच्चे की मानिटरिंग के लिए हेल्थ कार्ड पर ध्यान देने के बारे में भी सुझाव दिए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने कहा, बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए माताओं का स्वस्थ रहना जरूरी है, इसलिए गर्भवती महिलाओं तथा शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार की जानकारी दी जाएगी। वहीं रेडी-टू-ईट से विभिन्न प्रकार के पकवान भी बनाए जाएंगे जिससे बच्चे खाने में रुचि लें। कुपोषण को पौष्टिक भोजनए दवाइयां और व्यवहार में परिवर्तन से ही दूर किया जा सकता है।
