राजनांदगांव। डोंगरगांव ब्लाक के गुगेरी नवागांव में जिस वन भूमि से पत्थर की अवैध खोदाई की गई है, वह आरक्षित वन है। वहां फारेस्ट की अनुमति के बिना प्रवेश भी गैर-कानूनी है, लेकिन तस्करों ने लाखों रुपये का पत्थर खोदकर निकाल डाला। वन विभाग की जांच में अब पूरे मामले की परत खुलने लगी है। वन सुरक्षा अधिनियम में ऐसे प्रकरणों में जब्त वाहनों के अनिवार्य राजसात का प्राविधान है।
गुगेरी नवागांव में वनभूमि से पत्थर की अवैध खोदाई मामले की एसडीओ स्तर पर जांच फारेस्ट विभाग करा रहा है। मौके पर जाकर देखा जाएगा कि कितनी खोदाई की गई व इससे रायल्टी वगैरह के रूप में कितने का नुकसान हुआ है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जिस जगह पर जेसीबी मशीन से पत्थर खोदा गया, वह रिजर्व फारेस्ट लैंड है। यानी आरक्षित वन भूमि। वहां किसी भी प्रकार की आवाजाही प्रतिबंधित है, जबकि तस्करों ने वहां कई दिनों तक न केवल बिना अनुमति प्रवेश किया, बल्कि आरक्षित वन भूमि से अवैध खोदाई व परिवहन भी कर लिया।
पिछले दिनों वन विभाग ने गुगेरी नवागांव से नदी किनारे पत्थरों की अवैध खोदाई का मामला पकड़ा था। तीन ट्रकों के साथ एक जेसीबी मशीन भी जब्त की गई थी। फारेस्ट ने वन संरक्षण अधिनियम 1927 की धारा 52 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। ऐसे प्रकरणों में वाहनों को अनिवार्य रूप से राजसात करने का प्राविधान है, लेकिन उसके पहले पूरी प्रक्रिया के साथ जांच कराई जा रही है।
सड़क निर्माण में खपाया चोरी का पत्थरवन विभाग की अब तक की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि चोरी के पत्थरों का इस्तेमाल दो तरह से किया गया है। कुछ मात्रा में पत्थरों को सुखरी में नदी किनारे डंप कराया गया। ज्यादातर पत्थर सड़क निर्माण में खपाया गया है। विभाग यह पता लगा रहा है कि किन सड़कों के निर्माण के लिए आरक्षित वन भूमि से निकाले गए पत्थर का उपयोग किया गया।
