गणेश व मां दुर्गा की प्रतिमाओं को बिक्री कर अपने परिवार को पालने वाले ग्राम थनौद का हाल पिछले साल से भी बदतर है। कोरोना की वजह से गत वर्ष जहां 4 फीट की प्रतिमाओं की परमिशन मिली थी, वहीं इस बार गांव तक न ग्राहक आ रहे और न ही व्यापारी। डेढ़ माह में गणेश चतुर्थी की शुरुआत है और यहां के करीब 40 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। मूर्तियां बनाने लोन ले रखे हैं। गांव में ज्यादातर मूर्तिकार कर्जदार है। यहां तक घरों को नीलाम करने की धमकियां भी मिलने लगी है। संकट ऐसा कि इस सीजन में पिछली बार बनी हुई चार फीट की प्रतिमाओं को ही पेंट कर रहे हैं। ताकि इस सीजन में कुछ तो ग्राहकी हो सके।
यहां के मूर्तिकार-कलाकार राधेश्याम चक्रधारी बताते हैं कि गांव में परिवार वालों ने पीढ़ियों से सिर्फ मूर्तिकारी ही सीखी है। उनके पास न खेती-बाड़ी है और न ही दूसरा कारोबार। इस वजह से वे मूर्तिकला पर ही आश्रित हैं। अब परिवार चलाने के लिए सभी को जूझना पड़ रहा है। गणेश चतुर्थी को मात्र डेढ़ माह बचे है लेकिन एक भी ग्राहक के ऑर्डर किसी के पास नहीं हैं। कई मूर्तियां अभी भी रखी है। उनकी मांग है कि सरकार से मुआवजा भले न मिले लेकिन उन्हें किसी तरह का काम जरूर दिलवाए। ताकि वे अपने परिवार का पेट पाल सकें।
व्यापारियों ने अब तक संपर्क नहीं किया
उनका मानना है कि गणेश पंडाल लगाने के लिए इस बार न तो कोई चंदा इकट्ठा हो रहा है और न ही कोई फाइनेंसर सामने आ रहा। इस वजह से ग्राहक या कोई व्यापारी ने उन्हें संपर्क ही नहीं किया। नहीं तो अब तक सैकड़ों ऑर्डर आ जाते थे। वे खुद 20 बड़ी प्रतिमाएं बनाते थे, वह अब घटकर महज 5 या 6 रह गई है, उसकी भी उम्मीद नहीं है कि कोई खरीदार मिल जाए। वे पिछले साल बनी 4 फीट की प्रतिमाओं को पेंट कर रहे हैं।
50 लाख तक कारोबार, एक लाख लोग पहुंचते थे गांव
थनौद एक ऐसा गांव है, जहां से पूरे छत्तीसगढ़ के अलावा उड़ीसा, झारखंड, महाराष्ट्र के बॉर्डर से लगे शहरों में प्रतिमाएं ले जाई जाती रही है। करीब तीन हजार मूर्तियां हर सीजन में बनती थी। 10 फीट तक की ऊंचाई वाली प्रतिमाएं आज भी जस की तस रखी हुई हैं। मूर्तिकार राधेश्याम चक्रधारी बताते हैं कि पिछले ऑर्डर की मूर्तियां तक नहीं बिक पाई हैं। सीजन में 50 लाख रुपए तक का कारोबार होता था। छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 3000 प्रतिमाएं गांव में ही बनती थीं। सीजन में करीब एक लाख लोग प्रतिमाएं खरीदने गांव पहुंचते थे, जिससे पूरा गांव व्यापार करता था। किराने की दुकानें, होटलों का भी धंधा मंदा हो गया है।
मुख्यमंत्री से मिले थे पखवाड़े भर पहले
यहां के राधेश्याम के अलावा अंजोरी, थानेश्वर चक्रधारी, मिलन व श्यामलाल चक्रधारी ने बताया कि पखवाड़े भर पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर उन्होंने अपनी व्यथा बताई थी। सीएम ने कहा है कि फिलहाल चार फीट की ही प्रतिमाएं बनाएं। पिछले गाइडलाइन के हिसाब से प्रतिमाएं तैयार करें। नई गाइडलाइन आएगी तो देखा जाएगा।
