माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बारहवीं का परिणाम जारी कर दिया है। जिले के 97.77 फीसदी परीक्षार्थी बारहवीं पास हो गए हैं। इसमें 96.1 फीसदी प्रथम श्रेणी पर है। खास बात यह है कि घर बैठे एग्जाम देने के बाद भी 351 परीक्षार्थी फेल हो गए, इनमें सबसे अधिक 225 कला संकाय के हैं ।
कोरोना महामारी के चलते इस बार बारहवीं की परीक्षा केंद्रों की बजाए घरों से ही आयोजित हुई। परीक्षार्थियों को पर्चे स्कूल से जारी किए गए,हर पर्चे को हल करने के लिए पांच दिन कार समय मिला । इसी का असर है कि रिजल्ट के आंकड़े में ऐसा उछाल दिखा है। वहीं कुल परिणाम पर नजर डालें तो बीते साल की तुलना में 11.57 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2020 में बारहवीं का परिणाम 86.2 फीसदी था। इधर उम्मीद से बेहतर परिणाम को लेकर परीक्षार्थी भी उत्साहित दिखे । द्वितीय श्रेणी में 296 और तृतीय श्रेणी में महज 5 परीक्षार्थी ही रहें हैं। बीते सालों की तुलना में बारहवीं का यह परिणाम अपने आप में रिकार्ड है। हालाकि टॉप टेन सूची में जगह बनाने की उम्मीद लगाए परीक्षार्थियों को जरूर निराशा हाथ लगी है।
पूरक की श्रेणी में 111 छात्र-छात्राएं 115 बच्चे परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए
जिले में बारहवीं की परीक्षा के लिए 20983 अभ्यर्थियों ने पंजीयन कराया था, इसमें 20868 ही परीक्षा में शामिल हुए। जबकि 115 घर बैठे पर्चा हल करने की सुविधा के बाद भी शामिल नहीं हुए। परिणामों में 200032 प्रथम श्रेणी में रहें। 11 परीक्षार्थियों का रिजल्ट रोका गया है, वहीं 111 परीक्षार्थियों को पूरक की पात्रता मिली है। वहीं 60 परीक्षार्थियों के परिणाम निरस्त कर दिया गया है।
कॉलेजों में दाखिले को लेकर होगी माथापच्ची
बारहवी के इस परिणाम का असर अब कॉलेजों में दाखिल पर पड़ेगा। जानकारों का मत है कि इस परिणाम के बाद कॉलेजों में सीट की मारामारी बढ़ेगी। अब तक बेहतर अंक वालों को प्राथमिकता के आधार पर सीट आवंटित होते रहें हैं,लेकिन अभी जारी हुए परिणामों में ज्यादातर परीक्षार्थियों के अंक एक जैसे हैं, जिसका असर एडमिशन के दौरान होगा । सभी के हाई परसेंट के चलते लगभग हर संकाय में सीट के लिए माथापच्ची होगी । शहर के कॉलेजों में दूरस्थ ब्लाकों से भी स्टूडेंट्स ग्रेजुएशन करने दाखिला लेते हैं।
टॉपर्स में निराशा, खत्म हो गई प्रतिस्पर्धा
कोरोना वायरस के कारण बोर्ड परीक्षा के बदले पैटर्न के चलते दसवीं की मेरिट सूची जारी नहीं की गई थी, यही स्थिति बारहवीं में भी रही। इसके चलते टॉपर्स को निराशा हाथ लगी है। बीते कक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले स्टूडेंट्स ने बताया कि परीक्षा के इस पैटर्न से वे संतुष्ट नहीं हैं। इससे प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म हो गई। उन्होंने बताया कि बारहवीं में राज्य व जिला स्तर पर शीर्ष स्थान में जगह बनाने का लक्ष्य बनाकर पढ़ाई की थी, लेकिन ऐसे पैटर्न ने सभी को एक ही कतार में खड़ा कर दिया।
