पेंड्री स्थित करोड़ों की बिल्डिंग में मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का संचालन 10 जुलाई तक शुरू कर देने का दावा अफसरों ने किया था। कई दौर की बैठकें हुईं। सामानों की शिफ्टिंग भी शुरू कर दी गई थी पर जिला अस्पताल का मुद्दा उठते ही इस पर भी अचानक ब्रेक लग गया। इसकी सबसे बड़ी वजह स्टाफ की कमी है। लगभग 500 बेड का हॉस्पिटल संचालित करने के लिए तीन सौ से ज्यादा रिक्त पदों को पहले भरना होगा। मैन पावर के अभाव के चलते हॉस्पिटल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रबंधन की ओर से लगातार शासन स्तर पर स्टॉफ की भर्ती को लेकर गुहार लगाई जा रही है पर अब तक हरी झंडी नहीं मिलने से पूरी प्रकिया अधर में अटक गई है। पेंड्री स्थित बिल्डिंग में डेढ़ साल से 300 बेड का कोविड-19 हॉस्पिटल संचालित किया जा रहा है। जिले में जैसे ही कोविड के मरीजों की संख्या कम हुई।
लेटलतीफी: तय तारीख से शुरू नहीं हो सका मेडिकल कॉलेज अस्पताल का संचालन
मुद्दा उठते ही शांत हुए: सीधे समानों को पेंड्री ले जाने का काम शुरू कर दिया गया। वहीं इस बीच शहर के जनप्रतिनिधियों की ओर से मुद्दा उठाया गया कि जिला अस्पताल की बिल्डिंग का क्या होगा? इस पर मुख्यमंत्री का आश्वासन मिलने के बाद सिविल सर्जन ने डीएचएस के समानों को पेंड्री ले जाने पर रोक लगा दी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से अपने समानों की शिफ्टिंग कराई जा रही थी पर 10 दिनों से इस पर सुस्ती छाई हुई है।
इस श्रेणी के कर्मचारियों की कमी
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन के पास सेटअप के अनुसार कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। लगभग तीन से ज्यादा पोस्ट द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की है। अभी डीएचएस और दैनिक वेतन पर रखे गए कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। कोविड हॉस्पिटल में तो तीन माह के लिए कर्मचारी रखे गए थे।
फंड के अभाव में नियमित भर्ती ही नहीं की गई। इधर अस्पताल में मरीजों का आना कम होते ही प्रशासन की ओर से शिफ्टिंग को लेकर प्लान किया गया और हॉस्पिटल प्रबंधन को मियाद दी गई कि 10 जुलाई तक शिफ्टिंग का काम पूरा कर लिया जाए पर मैन पॉवर की कमी दूर करने शासन-प्रशासन की ओर से कोई प्लान नहीं किया गया। अस्पताल में लंबे समय से पद खाली हाेने के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है।
पीजी की तैयारी के बीच ऐसा संकट
हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से एमबीबीएस के साथ ही पीजी की तैयारी भी शुरू करा दी गई है। इसके लिए मान्यता का इंतजार है और इस बीच हॉस्पिटल संचालन में स्टॉक की कमी का रोड़ा आने से समस्या गंभीर हो गई है। पीजी शुरू होने से यहां पर एक्सपर्ट डॉक्टर तैयार होंगे। एमबीबीएस के बाद पीजी करने बाहर नहीं जाना पड़ेगा। सहायक अधीक्षक डॉ सीएस मोहबे का कहना है कि स्टॉफ की समस्या को लेकर शासन स्तर पर बात रख दी गई है। इस दिशा में प्रयास जारी हैै। जल्द रिजल्ट भी सामने आएगा।
ओटी की मशीनें नहीं
हॉस्पिटल प्रबंधन के पास स्वयं का सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, आधुनिक लैब, ओटी की मशीनें नहीं हैं। बसंतपुर हॉस्पिटल में रखी गई मशीनें डीएचएस की ओर से खरीदी गई है। इन मशीनों के बगैर पेंड्री में हॉस्पिटल का संचालन करना मुश्किल है। इन मशीनों के अभाव में मरीजों को पेंड्री से 5 किलोमीटर की दूरी तय कर बसंतपुर आना पड़ जाएगा।
इसलिए यहां के डॉक्टरों को रिलीव नहीं कर रहे
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में डीएचएस के लगभग 10 से 12 डॉक्टर कार्यरत हैं। कुछ डॉक्टर तो रिटायर्ड होने के बाद संविदा पर कार्य कर रहे हैं। इन डॉक्टरों को डीएचएस में रिलीव करने से डॉक्टरों की बेहद कमी हो जाएगी। जबकि जिला अस्पताल संचालन के लिए इन डॉक्टरों को रिलीव करने की मांग उठने लगी है।
