राजनांदगांव। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग पक्का मकान में रहने का सपना तो देखते ही है। ऐसे लोगों के सपनों को साकार करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की है। शहर में नगर निगम ने रेवाडीह के साथ लखोली क्षेत्र में पीएम आवास के तहत मकान तैयार कर लिया है। रेवाडीह में तो कई परिवार शिफ्ट तक हो गए हैं, लेकिन लखोली के मकान का आवंटन होने के बाद भी कई परिवार को सपनों के आवास की चाबी नहीं मिली है। लखोली में करीब 304 मकान बनें है। यहां शहर के डबरी पारा में रहने वाले 160 परिवार को व्यवस्थापन देने की तैयारी है, जिसमें से करीब 35 परिवार को मकान आवंटित तक की जा चुकी है। पर इन परिवारों को चाबी नहीं मिली है। इसके कारण ये परिवार अभी तक झोपड़ी में रहने को मजबूर है।
लखोली में 304 मकान तैयार
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के लखोली वार्ड में निगम प्रशासन ने 304 मकान बनाकर तैयार कर लिया है। यहां उन लोगों को व्यवस्थापन दिया जाएगा, जो शहर में झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे हैं और एक साल का जिनके पास पट्टा है। उन्हीं परिवारों को पीएम आवास के मकानों में प्राथमिकता दी जा रही है। निगम अफसरों की मानें तो शहर के डबरी पारा में मिले 160 परिवारों ने लखोली में आवास की मांग की है। आवास की प्रीमियम राशि जमा करने के बाद आवंटन की प्रक्रिया की जाएगी।
पीएम आवास के लिए दोबारा सर्वे
निगम ने शहर के डबरी पारा एरिया में दोबारा सर्वे शुरू किया है। पिछले साल निगम ने यहां सर्वे में 160 परिवारों का चयन किया था, जिसमें से 35 परिवार को व्यवस्थापन के तहत पीएम आवास भी लखोली में दे दिया है, लेकिन हैंडओवर नहीं किया गया है। इसके चलते ये परिवार पुरानी जगह ही गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि आने वाले माह में बचे पात्र परिवार का सत्यापन कर आवास आवंटन किया जाएगा। इससे पहले निगम दोबारा सर्वे करा रही है।
शहर के मोती तालाब नए बस स्टैंड के पास बसें करीब 35 परिवार को भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रेवाडीह में व्यवस्था दी गयी है। हितग्राहियों को नया मकान तक मिल गया है, जहां इनमें से अधिकांश लोगों ने घर शिफ्टिंग भी कर ली है। लेकिन विडंबना यह है कि पुराने मोती तालाब वाले घर को हितग्राही छोड़ नहीं रहे हैं। यहां भी कब्जे वाले घरों में लोग रह रहे हैं, जिन्हें खाली कराने नगर निगम प्रशासन कई बार इन परिवारों को नोटिस दे चुका है। कई बार मोहलत मांगने के बाद भी लोगों ने कब्जा नहीं छोड़ा है। वर्तमान में भी यहां के लोग कब्जा नहीं हटाने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
