उदयपुर व आसपास के कुछ किसानों के द्वारा सरकारी जमीन को अपना बताकर ठेकेदार व अन्य माध्यम से खुदवा कर बाकायदा खेती की जा रही है, जिसकी शिकायत लगातार सामने आ रही थी। समाचार पत्रों में मामले की खबर प्रकाशित होने के बाद 3 दिनों तक पटवारी व ग्राम प्रमुख लोगों के साथ खेतों का नापजोख किया। सरकारी जमीन का माप करने के पश्चात खपरी दरबार के 6 व उदयपुर के 2 किसान का खेत शासकीय जमीन निकला। जिसको खुदवाकर अपना बताकर किसानी कर रहे हैं।
कुछ किसान ऐसे भी हैं जिनका पूरा का पूरा खेत सरकारी है, जिस पर अवैध कब्जा कर किसानी कर रहे थे। खपरी दरबार का एक किसान बरछा धरसा में जो किसी दूसरे किसान के खेत को लीज में लेकर किसानी कर रहे हैं, पशुओं के चारा चरने के लिए चारागाह जाने वाले रास्ते को ही जोताई कर दिया गया है। पिछले साल भी शिकायत के आधार पर पटवारी ने खेत का माप किया था, जिन्हें सख्त हिदायत भी दी गई थी। लेकिन लोग की अपनी हठधर्मिता के चलते इस साल भी खेत में बुवाई कर दिया है।
जिसके शिकायत के आधार पर फिर दोबारा खेत का माप किया गया व खेत की सीमा में निशान बनाया गया। ऐसे किसानों द्वारा अपने खेत से लगे हुए लगभग 1 से 2 एकड़ खेतों को सरकारी जमीन को खेत बनवा कर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है।
इसकी रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को देंगे
हल्का पटवारी रवि चंद नेताम ने बताया कि ग्रामीणों से मिली शिकायत के आधार पर ग्राम उदयपुर के सीताडबरी खार व सालझोरी खार मैं जाकर सरकारी जमीन का माप किया और सरकारी जमीन के आधार पर माप करने के पश्चात खपरी दरबार की पांच व उदयपुर के 2 किसान साथ ही बरछा धरसा में खपरी दरबार के एक किसान का खेत शासकीय भूमि निकला।
इन किसानों के द्वारा लगभग 5 से 6 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। सभी किसानों का खेत माप हो जाने के पश्चात तहसीलदार को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
