राजनांदगांव । राज्य की इंट्री पाइंट पाटेकोहरा जांच चौकी में कोरोना जांच को लेकर जिस तरह की सख्ती करनी चाहिए, उससे कहीं ज्यादा यहां कर्मचारी सुस्ती दिखा रहे हैं। लापरवाही ऐसी है कि दिनभर में दर्जनों वाहन बिना कोरोना जांच कराएं ही गुजर जाती है। पुलिस के रूकवाने के बाद भी वाहनं यहां नहीं रूकती। यात्री बसें भी सरपट गुजर रही है। मोटर साइकिल में आने वालों में यहां रोका भी नहीं जा रहा है। शुक्रवार को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक दो हजार से अधिक वाहनं जांच चौकी से होकर गुजरी, लेकिन कोरोना जांच केवल 83 लोगों की ही हुई। राहत की बात यह है कि इन सभी लोगों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आयी है। एक दिन पहले गुरुवार को भी महज 103 लोगों की जांच की गई थी। जबकि दिनभर में सैंकड़ों वाहनं के साथ कई राज्यों से होकर आने वाली यात्री बसें भी यहां से गुजरती है। नईदुनिया ने शुक्रवार सुबह करीब चार घंटे तक जांच चौकी में रूककर महाराष्ट्र की ओर से आने वाले लोगों के कोरोना जांच की पड़ताल की, जिसमें यह पता चला कि बार्डर पर कोरोना जांच के नाम पर केवल औपचारिकता ही पूरी की जा रही है। कई वाहनं तो जांच चौकी के पास रूकवाने के बाद भी नहीं रूक रही है। इस पर प्रशासनिक अफसर व पुलिस की टीम कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इसी तरह की लापरवाही ही संक्रमण को हवा दे सकती है।
महाराष्ट्र की ओर से चार पहिया व अन्य वाहनों में आने वाले लोग पुलिस व स्वास्थ्य कर्मियों को कई तरह के बहाने बना रहे हैं। कोरोना जांच के नाम से लोग पुलिस को देखकर भी जांच चौकी के पास वाहनं नहीं रोक रहे हैं। कई वाहनं रूकने के बाद बिना जांच कराए ही निकल जा रही है। वहीं ज्यादातर लोग हाल में ही जांच कराने की बात कहकर कोरोना जांच कराने से हिचकिचा रहे हैं। कई तरह के बहाने भी बना रहे हैं। विडंबना यह है कि ऐसे लोगों की जांच करवाने के बजाय बिना टेस्ट कराएं इन्हें छोड़ा जा रहा है। जो गंभीर तरह की लापरवाही है।
पाटेकोहरा जांच चौकी में तीन पालियों में कोरोना की जांच होती है। सुबह-दोपहर और शाम इन तीन पालियों में कोरोना जांच के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के साथ शिक्षक और पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण यहां से दिनभर में सैंकड़ों वाहनं गुजरती है। हाइवे दिनभर खाली ही नहीं रहता। इन सबके बाद भी जांच चौकी में कोरोना की जांच कराने में लोग कतरा रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार की शाम तक करीब 186 लोगों को ही कोरोना जांच की गई, जिसमें सबकी रिपोर्ट निगेटिव आई। सवाल यह है कि जब दिनभर में आठ से दस यात्री बसें, सैंकड़ों निजी चार पहिया वाहनों में लोग यहां से गुजर रहे हैं। लेकिन जांच सिर्फ गिनती के लोगों की हो रही है।
शुक्रवार को नईदुनिया की टीम पाटेकोहरा जांच चौकी पहुंची। टीम ने जांच नाका में कोरोना जांच केंद्र का हाल देखा। यहां सुबह वाली शिफ्ट में दो स्वास्थ्य कर्मी और एक शिक्षक के साथ दो पुलिस जवान तैनात थे। राज्य की सीमा पर आने वाले निजी वाहनों में बैठे लोगों को कोरोना जांच के लिए रूकवाया जा रहा था। कई वाहनं यहां रूक तो रही थी, लेकिन कुछ न कुछ बहाना बनाकर लोग बिना जांच के ही निकल भी गए। कई लोग गाड़ी रोकने के बाद फिर गति बढ़ाकर भाग रहे हैं। शुक्रवार को यहां महाराष्ट्र के अलावा मध्य प्रदेश, ओड़िशा व छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के लोग पहुंचे। इनमें से गिनती के लोग ही कोरोना की जांच कराई।
कोरोना जांच रिपोर्ट दिखाना है या फिर कोरोना जांच कराना है। यह जरूरी है। अगर इस पर किसी तरह की लापरवाही की जा रही होगी तो कार्रवाई करेंगे। वैसे अभी नियमित रूप से कोरोना की जांच की जा रही है। यात्री बसों के चालकों को भी रोकने कहा जा रहा है। कोरोना की तीसरी लहर को देखते ही इंट्री पाइंट पर सख्ती जरूरी है।
