राजनांदगांव । कोरोना काल में बेरोजगारी का दंश झेल रहे जिले के मूर्तिकार व चित्रकार अब दीगर प्रदेशों से आ रहे कलाकारों को लेकर परेशान हैं। छत्तीसगढ़ मूर्तिकार-चित्रकार संघ ने शुक्रवार को कलेक्टरेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अन्य प्रदेशों से आ रहे मूर्तिकारों को राजनांदगांव में व्यवसाय करने से रोकने की मांग की। उनका कहना है कि दूसरे प्रदेशों के लोग यहां आकर उनके रोजगार के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं।
बीते लगभग दो वर्षों से कोरोना काल के चलते मूर्तिकारों के पास व्यवसाय नहीं है। राजनांदगांव के गणेश उत्सव के जरिए यहां के मूर्तिकार लगभग साल भर की रोजी-रोटी की व्यवस्था करते रहे हैं। कोरोना की वजह से शहर में जगह-जगह लगने वाला गणेश पंडाल नहीं लग पा रहा हैं। वहीं भगवान गणेश की बड़ी मूर्तियां भी स्थापित नहीं हो पा रही है, जिसके चलते मूर्तिकारों के पास रोजगार का संकट है। वहीं बमुश्किल गणेश पक्ष और नवरात्र में छोटी मूर्तियां बना कर वे अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। ऐसे में अन्य प्रदेशों के मूर्तिकार भी शहर में व्यवसाय के लिए पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय मूर्तिकारों का व्यवसाय प्रभावित होता है।
छत्तीसगढ़ चित्रकार मूर्तिकार संघ ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर कहा कि यहां अन्य प्रदेशों से आने वाले मूर्तिकारों को व्यवसाय से रोका जाना चाहिए, उन्होंने पश्चिम बंगाल में कोरोना के बढ़ते मामले का हवाला देकर कहा कि पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार यहां आकर पीओपी की मूर्तियां बना कर बेचते हैं, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है और कोरोना का खतरा भी बना हुआ है। छत्तीसगढ़ चित्रकार मूर्तिकार संघ के प्रदेश संरक्षक गोविंद्र सिंह ठाकुर और जिला अध्यक्ष देवा रंगारी ने कहा कि कोरोना काल में स्थानीय मूर्तिकारों का व्यवसाय नहीं के बराबर हो गया है। ऐसे में बाहर के मूर्तिकार यहां आकर व्यवसाय करेंगे तो फिर स्थानी मूर्तिकार को काम कैसे मिलेगा।
शहर के गणेश उत्सव की ख्याति पूरे प्रदेश भर में है। यही कारण है कि राजनांदगांव में अन्य प्रदेशों से भी मूर्तिकार यहां भगवान गणेश की प्रतिमा विक्रय के लिए पहुंचते हैं। गणेश उत्सव और नवरात्र में अन्य प्रदेशों के मूर्तिकारों के यहां व्यवसाय करने से स्थानीय मूर्तिकारों के व्यवसाय पर फर्क पड़ता है। संघ के जिला अध्यक्ष देवा रंगारी ने बताया कि कोरोना काल में शासन-प्रशासन से राहत की मांग कर थक चुके, मूर्तिकार अब चाहते हैं कि जो थोड़ा बहुत व्यवसाय बचा है, वह स्थानीय स्तर के मूर्तिकारों को ही मिले। यही कारण है कि मूर्तिकार चित्रकार संघ ने अन्य प्रदेशों के कलाकारों को यहां व्यवसाय से रोकने की मांग कलेक्टर से की है।
