राजनांदगांव । रिमझिम बारिश वाला महीना आषाढ़ न तो खेतों की प्यास बुझा सका, न ही गर्मी से निजात दिला पाया। धान के खेतों को अब भी पानी की जरूरत है, जबकि पसीने निकाल रही तेज गर्मी से छुटकारा के लिए जोरदार बारिश का इंतजार है। बीते वर्ष इसी अवधि में औसत बारिश का आंकड़ा 235 मिमी था, जबकि इसी वर्ष अब तक महज 210 मिमी ही बारिश हो सकी है। इससे फसलों के ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। खेतों में पर्याप्त पानी की कमी के कारण धान की रोपाई रूक गई है।
रिमझिम बारिश वाला माने जाने वाला आषाढ़ का महीना 25 जून से शुरू हुआ है। उसके -शुरुआती दिनों में मानसून की अच्छी सक्रियता देख किसान अच्छी फसल की संभावना जता रहे थे, लेकिन खेतों में पानी नहीं भरा होने से अब उनकी चिंता बढ़ने लगी है। जिले में अब तक मा्नपुर तहसील क्षेत्र की स्थिति ही सबसे बेहतर हैं जहां करीब 300 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं छुरिया में सबसे कम 160 मिमी बारिश ही रिकार्ड हो सकी है। डोंगरगांव ब्लाक के मारगांव निवासी किसान इश्वर लाल के अनुसार अभी खेतों में कुछ हद तक नमी तो है, लेकिन इसी तरह तेज धूप रही तो खेत सूखने लगेंगे। अभी ग्रोथ के लिए धान की फसलों को ज्यादा से ज्यादा पानी चाहिए। खेतों में लबालब पानी होना चाहिए। उम्मीद है जल्द ही मानसून मेहरबान होगा।
गर्मी के दिनों में तो जिला कई बार प्रदेश में सबसे गर्म रहा। अब बारिश के मौसम में भी गर्मी की प्रचंडता प्रदेश के दूसरे शहरों को पीछे छोड़ दे रही है। शुक्रवार को भी जिले में रायपुर से अधिक गर्मी पड़ी। दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं रायपुर में यह 29.7 डिग्री रिकार्ड किया गया। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 31.4 व दुर्ग में 31.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार मौसम का मिजाज कुछ दिनों तक इसी तरह बना रह सकता है। 10 जुलाई को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने अथवा गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर वज्रपात व भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके बाद भी अधिकतम तापमान में विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। यानी उमस वाली गर्मी से फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं है।
