देश के मूर्धन्य साहित्यकारों की यादों को संजोए रखने के लिए प्रशासन ने दिग्विजय कॉलेज के ठीक पीछे त्रिवेणी परिसर स्थापित किया है। यहां साहित्यकार स्व.पदुम लाल पुन्ना लाल बख्शी, गजानंद माधव मुक्तिबोध और डॉ.बल्देव प्रसाद मिश्र की मूर्तियां लगाई गई हैं।
वहीं उस कमरे को संग्रहालय बनाया गया है जहां गजानंद माधव मुक्तिबोध रहा करते थे और यहीं साहित्यिक सृजन करते थे पर अब विडंबना यह है कि पिछले एक साल से मुक्तिबोध के कमरे में बिजली नहीं है। अंधेरा छाया रहता है। कोरोना काल के पहले यहां साहित्य प्रेमियों की आवाजाही हुआ करती थी पर अब कमरे में अंधेरा होने की वजह से लोग भीतर जाने से कतराते हैं।
यहां पर मुक्तिबोध की ओर से लिखी गई रचनाओं की पांडूलिपि रखी हुई है। जीवनकाल में उपयोग में लाई गई वस्तुएं भी रखी गई हैं। मुक्तिबोध के अलावा पदुम लाल पुन्ना लाल बख्शी और डॉ.बल्देव प्रसाद की रचनाओं की पांडुलिपि भी यहां रखी गई है। चक्करदार सीढ़ियां भी हैं।
दूरदराज से आते हैं लाेग
इन साहित्यकारों की एक से बढ़कर एक रचनाएं रखी गई हैं। कोरोना काल के पहले देश के कोने-कोने से साहित्य प्रेमी इस संग्रहालय को निहारते आते थे। जाते-जाते बाकायदा रजिस्टर में अपने कमेंट्स भी लिखते थे पर कोरोना के चलते लॉकडाउन लगते ही यहां की रौनक भी चली गई। वहीं साहित्यिक साक्ष्यों का यह कक्ष अब उपेक्षा झेल रहा है।
केबल में खराबी आई
यहां एक साल से बिजली नहीं है। केबल में खराबी आई थी। देखरेख करने वाले कर्मचारियों ने दिग्विजय कॉलेज प्रबंधन के पास शिकायत की तो सुधार कराया गया था। फिर से केबल खराब हुआ तो फिर सुधारे ही नहीं। अब अंधेरे के चलते लोगों की यहां आवाजाही नहीं होती। कमरे में मुक्तिबोध का सिगरेट बॉक्स, पोशाक, चश्मा, दो कलम रखी गई हैं।
यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं
इस परिसर में नगर सैनिकों की ड्यूटी लगाई जा रही थी पर छह माह से यहां तैनाती ही नहीं हो रही है। जबकि रोज रात को यहां पर नशेड़ियों का जमघट रहता है। मारपीट की घटनाएं भी आए दिन होती रहती हैं। साहित्यकार आत्माराम कोसा का कहना है कि त्रिवेणी परिसर को व्यवस्थित किया जाना चाहिए ताकि यहां साहित्यिक गतिविधियां चलती रहे।
कॉलेज को सौंपने की हो चुकी मांग: एनएसयूआई की ओर से त्रिवेणी परिसर सहित सृजन संवाद भवन में दिग्विजय कॉलेज प्रबंधन को सौंपने की मांग हो चुकी है। इसके लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है। एनएसयूआई के जिला उपाध्यक्ष राजा यादव का कहना है कि यह परिसर में कॉलेज से लगा हुआ है। इसलिए कॉलेज प्रबंधन को सौंप देना चाहिए। कॉलेज प्रबंधन इसका इस्तेमाल कर सकता है।
