राजनांदगांव , नवरात्रि में मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट के 1200 कर्मचारियों का खाना इस बार लकड़ी से बनेगा। मेला ड्यूटी में तैनात 1100 से अधिक पुलिस जवानों के मेस में भी खाना बनाने लकड़ी की व्यवस्था की गई है। यह बदलाव कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी को देखते हुए किया गया है।
19 मार्च से डोंगरगढ़ में नवरात्रि मेले की शुरुआत हो रही है। मंदिर परिसर में करीब 1200 कर्मचारी 24 घंटे व्यवस्था व काम-काज में तैनात किए जाते हैं। इनके लिए 24 घंटे रसोई भी चलती है। रसोई में हर साल कॉमर्शियल सिलेंडर से खाना बनता था, लेकिन इस बार सिलेंडर की किल्लत हैं। एजेंसियों में सप्लाई रुकी हुई है। जिसे देखते हुए ट्रस्ट ने लकड़ी की खरीदी की है। कर्मचारियों से लेकर ट्रस्ट के लोगों के लिए भोजन बनाने लकड़ी का इस्तेमाल होगा। इसी तरह पुलिस प्रशासन ने भी लकड़ी का विकल्प तैयार किया है। जवानों के मेस में खाना बनाने के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी की खरीदी की गई है।
इधर मंदिर परिसर में 9 दिनों तक संस्थाओं द्वारा लगाए जाने वाले भंडारे को लेकर भी संशय बना हुआ है। नवरात्रि में मां बम्लेश्वरी के दर्शन के लिए डोंगरगढ़ में इस बार 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। हर दिन माता के दर्शन के लिए 1 से सवा लाख श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से तैयारी की जा रही है। छिरपानी परिसर में िजग-जैग सिस्टम से एंट्री की तैयारी है।
हर साल एलपीजी सिलेंडर से संस्थाओं के जरिए भोजन बनाया जा रहा था नवरात्रि के 9 दिन मंदिर के नीचे हिस्से में भंडारे का आयोजन होता है। यह भंडारा दुर्ग, रायपुर, नागपुर और गोंदिया के सेवाभावी संस्थाएं आयोजित करती हैं। भंडारे के लिए परिसर तय हैं। यहां हर साल एलपीजी सिलेंडर से ही खाना बनता रहा है। जिसकी व्यवस्था संस्थाएं स्थानीय स्तर पर करती हैं। लेकिन इस बार कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति थमी हुई है, घरेलू सिलेंडर भी अितरिक्त संख्या में नहीं मिल रहा। ऐसे में इन भंडारों पर संशय बना हुआ है।
मेला ड्यूटी व मंदिर में करीब 1100 जवानों की तैनाती रहेगी। जिनके मेस संचालन के लिए लकड़ी की खरीदी की जा रही है। प्रशासन को पत्र लिखकर सिलेंडर की मांग की गई है। लोकेश पटेल, रक्षित निरीक्षक
ट्रस्ट के कर्मचारियों के भोजन के लिए लकड़ी की खरीदी की गई है। लकड़ी से ही कर्मचारियों का भोजन बनेगा। भंडारा का आयोजन करने वाली संस्थाएं खुद ही अपनी व्यवस्था करती हैं। उन्हें नीचे परिसर में जगह दी जाती है।
