0 दुर्ग, भिलाई से आ रहा गुटखा*
0 शहर सहित आउटर इलाके में है बड़े- बड़े गोदाम
*राजनांदगांव.* शहर सहित जिलेभर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखा पाऊच की खुलेआम बिक्री की जा रही है और नाबालिग बच्चों के साथ- साथ युवा वर्ग सहित कई घर इस नशे की चपेट में आ गए है. इसके बाद भी यह लोग खुलेआम मौत का सामान बेच रहे है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के हर छोटे – बड़े पान दुकानों सहित शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों की किराना दुकानों में जर्दायुक्त गुटखे की बिक्री बेधड़ की जा रही है. जबकि छत्तीसगढ़ में पूरी तरह से जर्दायुक्त गुटखा पर प्रतिबंध लगा हुआ है. लेकिन विभाग कार्यवाही करने की बजाए इन्हें खुली छूट दे रखा है. बीच- बीच में पुलिस विभाग द्वारा खानापूर्ति करते हुए एक- दो छोटी- मोटी कार्यवाही की थी. उसके बाद भी बड़े व्यापारी खुलेआम जर्दायुक्त गुटखा का व्यापार कर रहे है. जिस पर ना तो विभाग का नियंत्रण है और ना ही पुलिस का.
*नाबालिगों को बेचा जा रहा गुटखा पाऊच*
जर्दायुक्त गुटखा जिस प्रकार से बाजार में बेचा जा रहा है और युवा वर्ग के साथ- साथ 10 से 12 साल के नाबलिग बच्चों को इसकी बिक्री की जा रही है. उससे तो ऐसा ही लग रहा है कि इन व्यापारियों को किसी प्रकार को कोई डर नहीं है. लंबी सैटिंग के चलते यह सब अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है.
*दुर्ग- भिलाई और रायपुर से आ रहा गुटखा*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अवैध रूप से चल रहे जर्दायुक्त गुटखा दुर्ग- भिलाई और रायपुर से खुलेआम प्रायवेट गाड़ियों के अलावा ट्रांसपोर्ट के माध्यम से मंगाया जा रहा है. लाक डाऊन के दौरान पूरे जिले में कमी बताकर दुगुने और चौगुने रेट पर इसे खपाया गया है.
*शहर सहित आउटर इलाके में है बड़े- बड़े गोदाम*
मिली जानकारी के अनुसार शहर सहित आउटर इलाकों में जुर्दायुक्त गुटखा बेचने वाले व्यापारियों के बड़े-बड़े गोदाम स्थित है. जहां से पूरे सामन की सप्लाई की जा रही है. बताया जा रहा है कि कुछ माह पूर्व राजनांदगांव के सोमनी स्थित एक साबून फैक्ट्री में जर्दायुक्त गुटखा बनाने का काम चल रहा था. जिसे अभी राजनांदगांव के शहरी क्षेत्र में स्थापित किया गया है. जिसका संचालन बेधड़ किया जा रहा है और लाखों रूपए का गुटखा रोजाना बेचा जा रहा है.
*छोटे व्यापारियों पर कार्यवाही, बड़ों को अभयदान*
संबंधित विभाग एवं पुलिस द्वारा समय- समय पर अपनी उपस्थिति दिखाने के लिए छोटे व्यापारियों के अलावा पान दुकान और किराना व्यापारियों पर कार्यवाही करते हुए खानापूर्ति की जाती है. लेकिन बड़े व्यापारियों और गोदाम मालिकों से सांठगांठ कर उन्हें अभयदान दे दिया जाता है.






