मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में जिम्मेदारों की अजब लापरवाही सामने आई है। मरीज की मौत के बाद हॉस्पिटल के संबंधित डॉक्टर पोस्टमार्टम करना भूल गए। जिसके चलते सूचना मिलने के बाद चिता से उठाकर शव को 50 किमी दूर पीएम के लिए परिजनों को फिर हॉस्पिटल लाना पड़ गया।
खैरागढ़ ब्लॉक के बफरा निवासी कमल चक्रधारी (48 वर्ष) को जहरीले सांप ने डंस लिया। उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए शुक्रवार रात मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लाया गया। मरीज की हालत बिगड़ती गई और शनिवार की सुबह करीब 8 बजे उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लेकिन इसके बाद हॉस्पिटल की ओर से पीएम की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और शव परिजनों को सौंप दिया गया। कमल के परिजन भी शव लेकर गांव लौट गए। जहां उसके अंतिम संस्कार की तैयारी शुरु हुई। परिजन शव को लेकर श्मशान घाट तक पहुंच गए। तब हॉस्पिटल से परिजनों को फोन गया। जिसमें उन्हें पीएम के लिए शव वापस लाने की बात कही गई।
अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी कर ली गई थी
बफरा से राजनांदगांव की दूरी करीब 50 किमी. है। हास्पिटल से फोन जाने तक अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी कर ली गई थी। जिसके चलते परिजन दोबारा शव को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लाने को तैयार नहीं हो रहे थे। लेकिन गांव के प्रमुखों और जिम्मेदार लोगों ने परिजनों को समझाया। शनिवार दोपहर परिजन शव लेकर फिर राजनांदगांव लौटे, जहां मृतक के पीएम की प्रक्रिया पूरी की गई ।
डॉक्टर बोले- पुलिस के आने से पहले ले गए शव
इधर पूरे मामले में हॉस्पिटल की ओर से परिजनों को ही जिम्मेदार बता दिया गया है। हास्पिटल के डॉ. हिमांशु बंजारे ने बताया कि एमएलसी प्रकरण होने के चलते मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस को पीएम के लिए लाने में कुछ देर हुई, इसके पहले ही परिजन जल्दबाजी में शव लेकर चले गए। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में हास्पिटल के बनाए सिस्टम पर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
परिजनों को जानकारी देने वाला यहां पर कोई नहीं
मेडिकल कॉलेज हास्पिटल में औंधी, खड़गांव, साल्हेवारा से लेकर पड़ोसी जिले के लोग भी इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन मरीज को लेकर आने वाले परिजनों को यहां छोटी-छोटी जानकारी के लिए भटकना पड़ता है। हॉस्पिटल में ऐसी कोई स्थाई व्यवस्था नहीं की गई है कि मरीज या परिजनों को समय पर सही जानकारी इलाज या विभाग से प्रक्रिया के संबंध में मिल सके।
