राजनांदगांव। जिले में मानसून का आगमन हो गया है। किसान खेती की तैयारी में व्यस्त हो गये है जिले में ज्यादातर किसानों के द्वारा धान की फसल ली जाती है। पिछले वर्ष किसानों के द्वारा तीन लाख 28 हजार 139 हेक्टेयर रकबे में धान की फसल ली गई है। धान की फसल के स्थान पर अरहर, मक्का, उड़द, मूंग, सोयबीन, केला, पपीता जैसे फसलों की अधिक आय प्राप्त कर सकते है। धान फसल में अन्य फसलों की अपेक्षाकृत लागत अधिक लगता है, जिससे अनुपातिक रूप से कम शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।
धान की फसल को अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है, जिसके कारण कई क्षेत्रो में धान फसल की जल की पूर्ति नहीं होने से कम उपज का सामना करना पड़ता है। धान फसल में भूमि तैयारी, जुताई, बोआई में अधिक लागत लगता है। इसी प्रकार धान फसल में खरपतवार, निंदाई की अधिक समस्या होने से निंदाई में भी अधिक लागत आता है। धान फसल में अधिक उरर्वक लगता है, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता में कमी आती है तथा लागत भी अधिक हो जाती है। दलहन-तिलहन फसलों के कम लागत लगने से शुद्ध लाभ अधिक प्राप्त होती है।
धान के स्थान पर कम पानी में आसानी से अरहर, मूंग, उड़द, सोयाबीन, मक्का, कोदो-कुटकी, तिल की फसल ली जा सकती है। जिनकी बाजार मूल्य धान से भी अधिक है। साथ-साथ ही दलहन-तिलहन फसलों से अच्छा उत्पादन प्राप्त कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते है। धान की समर्थन मूल्य एवं बोनस मिलाकर 2500 रूपए प्रति क्विंटल है, जबकि अरहर की 6800 रूपए प्रति क्विंटल, मूंग की 6100 रूपए प्रति क्विंटल, उड़द फसल की 5900 रूपए प्रति क्विंटल, सोयबीन फसल की 7000 रूपए प्रति क्विंटल तथा कोदो-कुटकी 2500 रूपए प्रति क्विंटल बाजार मूल्य होता है।
धान की फसल से एक हेक्टेयर में 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन पैदावार होती है तथा समर्थन मूल्य एवं बोनस मिलाकर 2500 रूपए प्रति क्विंटल से मात्र एक लाख रूपए प्राप्त होता है। इसी प्रकार दलहन, अरहर फसल से 15 क्विंटल उत्पादन मिलने से मण्डी एवं बाजार भाव 6800 रूपए दर से विक्रय करने पर एक लाख दो हजार रूपए धन राशि प्राप्त होत है। जो धान फसल की अपेक्षा अधिक है तथा अरहर फसल में धान की अपेक्षा कम लागत होने से आय भी अधिक मिलती है। इसी प्रकार आय दलहन-तिलहन फसलों में भी अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।
धान की फसल की खेती में खेती लागत अधिक होने से प्रति क्विंटल लाभ प्रतिशत लगभग 50-56 प्रतिशत तक प्राप्त होता है, जबकि दलहन-तिलहन फसल के तहत मक्का में लाभांश लगभग 74 प्रतिशत, अरहर में 84 प्रतिशत, उड़द 70 प्रतिशत, मूंग 75 प्रतिशत है, जो धान की अपेक्षा बहुत अधिक है। शासन द्वारा दलहन-तिलहन के उत्पादन को प्रोत्साहित करने हेतु राजीव गांधी किसान न्याय योजना प्रारंभ की गई है। जिसके तहत योजनांतर्गत खरीफ 2021 से धान के साथ खरीफ की प्रमुख फसल मक्का, कोदो कुटकी, सोयाबीन, अरहर तथा गन्नाा उत्पादक कृषकों को प्रति वर्ष नौ हजार प्रति एकड़ आदान सहायता राशि दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में जिस रकबे से किसान द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया था। यदि वह धान के बदले कोदो कुटकी, गन्नाा, अरहर, मक्का, सोयाबीन, दलहन, तिलहन, सुगंधित धान, अन्य फोर्टिफाईड धान, केला, पपीता अथवा वृक्षारोपण करता है, तो उसे प्रति एकड़ 10 हजार रूपए आदान सहायता राशि दी जायेगी। वृ?क्षारोपण करने वाले कृषकों को तीन वर्षों तक आदान सहायता राशि दी जायेगी।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसान धान के बदले अन्य चयनित फसलों का पंजीयन एक जून से 30 सितंबर तक करा सकते हैं। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा खसरा का सत्यापन उपरांत संबंधित सेवा सहकारी समितियों से नियत तिथि में पंजीयन कराना होगा, पंजीकृृत किसानों को ही योजना का लाभ प्राप्त होगा।
