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 मोहला : वनमंडल में वन्य प्राणी संरक्षण व अग्नि सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित

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मोहला : वनमंडल में वन्य प्राणी संरक्षण व अग्नि सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित
मोहला : वनमंडल में वन्य प्राणी संरक्षण व अग्नि सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित

– अग्नि सीजन 2026 को लेकर मोहला वन विभाग सतर्क, रोकथाम के लिए व्यापक तैयारी

– एंटी स्नायर वॉक और फायर प्रबंधन पर ग्रामीणों को दिया गया प्रशिक्षण

– वनाग्नि रोकथाम के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का लिया गया संकल्प

        मोहला, । गर्मी के मौसम में जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं और वन्य प्राणियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोहला वनमंडल द्वारा मानपुर काष्ठागार डिपो में एक व्यापक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी दिनेश पटेल, सूरज (नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी), उप वनमंडलाधिकारी मोहला, सभी परिक्षेत्र अधिकारी, वनमंडल के फील्ड अधिकारी, संयुक्त वन प्रबंधन समिति एवं लघु वनोपज समिति के अध्यक्ष, फायर वाचर तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।      
         कार्यशाला का उद्देश्य वन्य प्राणी संरक्षण, अवैध शिकार की रोकथाम तथा आगामी अग्नि सीजन को लेकर समन्वित रणनीति तैयार करना रहा। कार्यक्रम में सूरज द्वारा एंटी स्नायर वॉक के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों में नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों पर सतर्क निगरानी से अवैध शिकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और जैव विविधता संरक्षण के लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताया गया।


        आगामी अग्नि सीजन 15 दिवसीय फरवरी 2026 से 15 जून 2026 तक घोषित है। इस संबंध में बीते दो वर्षों में मोहला वनमंडल क्षेत्र में हुई आग की घटनाओं की समीक्षा की गई। आग लगने के प्रमुख कारणों और बार-बार प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का विश्लेषण कर एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जंगलों में आग की अधिकांश घटनाएं प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही से होती हैं। महुआ फूल संग्रह के दौरान पत्तों को जलाना, खेतों में पराली जलाना तथा असावधानीपूर्वक आग का उपयोग प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे इस प्रकार की गतिविधियों से बचें और दूसरों को भी जागरूक करें।


            कार्यशाला में आग से होने वाले नुकसान पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि वनाग्नि से न केवल बहुमूल्य वन संपदा और वन्यजीवों का आवास नष्ट होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता घटती है, जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और स्थानीय जलवायु संतुलन भी बिगड़ता है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की आजीविका और पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ता है।
वन विभाग द्वारा अग्नि नियंत्रण के लिए की गई तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि अग्नि नियंत्रण कक्ष स्थापित कर सतत निगरानी की जा रही है। स्ट्राइक फोर्स वाहनों के माध्यम से विशेष दल तैनात किए गए हैं तथा संवेदनशील क्षेत्रों में फायर वाचरों की नियमित तैनाती सुनिश्चित की गई है। महुआ संग्रहण से जुड़े संभावित आग की घटनाओं को रोकने के लिए वन क्षेत्रों में स्थित महुआ वृक्षों की ग्रामवार गणना कर सूची तैयार की जा रही है, ताकि संबंधित गांवों में विशेष सतर्कता बरती जा सके।
         कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों को फील्ड में ले जाकर फायर ब्लोअर सहित अन्य उपकरणों के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। आग लगने की स्थिति में त्वरित एवं सुरक्षित कार्रवाई की प्रक्रिया समझाई गई, जिससे वनकर्मियों और समिति सदस्यों का आत्मविश्वास बढ़ा। कार्यक्रम के माध्यम से वन विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया कि वन संरक्षण केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, और सभी के सहयोग से ही वनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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