रायपुर, 13 जून 2021
(1) रूक्मणी सूर्यवंशी, जिला-जांजगीर चांपा
– मैं जिला जांजगीर-चांपा से रूक्मणी सूर्यवंशी बोलत हंव। माननीय मुख्यमंत्री जी को सादर प्रणाम। माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने हमें गोधन न्याय योजना की सौगात देकर वास्तव में गोबर को गोधन बना दिया है। इससे हमें अतिरिक्त आय हो रही है। वर्मी कम्पोस्ट और गोबर खातू को लेकर आप नया क्या करने जा रहे हैं। धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जबाव
– धन्यवाद रूक्मणी बहन। गोधन न्याय योजना को सफल बनाने के पीछे बहुत बड़ा योगदान हमारी माताओं-बहनों का है।
– सरकार ने गोबर खरीदने के लिए दो रूपए किलो और वर्मी कम्पोस्ट बेचने के लिए 10 रूपए प्रति किलो की दर निर्धारित की है। हम चाहते हैं कि हमारे किसान भाई बड़े पैमाने पर हमारे गौठानों में निर्मित वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें।
– वर्मी कम्पोस्ट से जमीन के पोषक तत्व तथा उपजाऊपन में वृद्धि होती है, जिससे पौधों की बढ़त में तेजी आती है। इससे जैविक खेती तथा अच्छी गुणवत्ता की फसल लेने में मदद मिलती है।
– हमने गोबर खातू का उपयोग बढ़ाने के लिए सुपर कम्पोस्ट भी लांच कर दी है, जिसका न्यूनतम मूल्य 6 रूपए प्रति किलो है। मेरा निवेदन है कि ज्यादा से ज्यादा किसान भाई अपने प्रदेश में निर्मित जैविक खाद का उपयोग करंे और भरपूर फसल से अच्छा लाभ कमाएं।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, प्रदेश में कोरोना संक्रमण, नियंत्रण व रोकथाम के उपायों तथा सावधानियों के बारे में हमारे श्रोताओं को अपने अनुभव साझा करना चाहेंगे।
– हम चाहेंगे कि हमारे श्रोता कोरोना नियंत्रण के लिए अपनाए गए उपायों के बारे में जानें तथा आगे के लिए सावधान भी रहें। क्योंकि अभी यह मानना उचित नहीं होगा कि खतरा समाप्त हो गया है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– कोरोना की दूसरी लहर, वायरस के नए वेरिएंट के साथ आई थी और तेजी से बढ़ने लगी थी। अप्रैल में संक्रमण दर 30 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। एक माह के भीतर हमने संक्रमण दर को 27 प्रतिशत से गिराकर 2.7 प्रतिशत तक लाने में सफलता प्राप्त की।
– हमने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, निजी अस्पताल संचालकों, सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और जागरूक जनता की मदद से एक पारदर्शी व्यवस्था बनाई। रियल टाइम बेसिस पर वेबसाइट पर अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता प्रदर्शित की गई।
– अस्पतालों में दवा, इंजेक्शन, ऑक्सीजन सिलेण्डर आदि की उपलब्धता के लिए काफी सोच-समझकर इंतजाम किए गए।
– साधारण लक्षण वाले मरीजों को घर पहुंचाकर दवा दी गई।
– ट्रू-नाट, एंटीजन टेस्ट, आरटीपीसीआर से लेकर एचआर सिटी स्केन आदि सभी की दरों पर भी नियंत्रण किया गया, जिससे जांच में वृद्धि हुई।
– सरकारी स्तर पर भी बड़े पैमाने पर सैंपल लेने और सही समय पर जांच के इंतजाम किए गए।
– ऐसे बहुत सारे प्रयासों के कारण ही प्रदेश में कोरोना की पॉजिटिविटी दर बहुत तेजी से कम हुई, इसके लिए मैं सरकारी अमले के साथ ही आम जनता, स्वयंसेवी संस्थाओं, खुले दिल से सहयोग देने वाले व्यवसायी, उद्योगपति समुदाय सभी के प्रति शुक्रिया अदा करता हूं।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, कोरोना से मुकाबला करने का सबसे बड़ा हथियार टीकाकरण को माना गया है। कृपया टीकाकरण को लेकर अपनी सोच और रणनीति के बारे में बताने का कष्ट कीजिएगा।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– हमने शुरू से टीकाकरण को लेकर उच्च प्राथमिकता से काम किया। राष्ट्रीय स्तर पर जो आकलन हुए हैं, उसके अनुसार हेल्थ केयर वर्कर्स को शत्-प्रतिशत, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 90 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों को पहली खुराक दी जा चुकी है, जिससे छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर है।
– प्रदेश में 45 वर्ष से अधिक के 58 लाख 67 हजार लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य है। इनमें से 45 लाख 31 हजार से अधिक लोगों को कोरोना से बचाव का पहला टीका लगाया जा चुका है।
– 18 से 44 वर्ष आयु के 8 लाख 31 हजार युवाओं का टीकाकरण किया जा चुका है। अब तक 71 लाख 14 हजार टीके लगाए गए हैं।
– छत्तीसगढ़ देश में 6वें स्थान पर हैं, हमसे जो 5 राज्य आगे हैं, वे क्षेत्रफल और जनसंख्या के मामले में काफी छोटे हैं। जैसे लद्दाख, सिक्किम, लक्षद्वीप, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश।
– इसी प्रकार टीकों की एक-एक बूंद के सदुपयोग के मामले भी छत्तीसगढ़ काफी अच्छी स्थिति में है।
– जब टीकों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर काफी समस्याएं और अभाव बताया जा रहा है। तब मुझे यह कहते हुए काफी संतोष होता है कि हमने आगे बढ़कर कहा था कि यदि कहीं और से मदद नहीं मिली तो छत्तीसगढ़ सरकार स्वयं सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क टीकाकरण की व्यवस्था करेगी। पहले जब 45 प्लस आयु वर्ग के लोगों को टीका लगाना था तो हमने पूरी तरह से सुचारू व्यवस्था की।
– 18 प्लस आयु वर्ग को टीका लगाने की घोषणा करने के बाद टीकों की उपलब्धता को लेकर जब संकट पैदा हुआ तो हमने पहले ही टीका उत्पादकों को एडवांस में राशि व आपूर्ति का आदेश प्रेषित किया था, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर असंगत नीति व उत्पादक कंपनियों द्वारा आपूर्ति नहीं करने के कारण बहुत समस्याएं आई।
– अभी केन्द्र सरकार ने एक बार फिर अपनी नीति बदलते हुए स्वयं निःशुल्क टीकाकरण की घोषणा की है। मुझे खुशी है कि हम जो बात शुरू से कह रहे थे, आखिर वहीं पर जाकर सहमति बनी।
– लोक कल्याण के लिए ऐसे खर्च राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाने की बहुत सी मिसालें पहले से हैं। हम चाहेंगे कि निजी क्षेत्र को जो 25 प्रतिशत टीके देने की बात कही गई है, उसमें भी सुधार हो और पूरे टीके आम जनता के लिए निःशुल्क उपलब्ध हों तो ज्यादा अच्छे नतीजे आएंगे।
