राजनांदगांव , भारतीय सेना के विशाल कुनबा में सैनिकों के अनगिनत वीरगाथाएं हैं, जिसके कारण भारतीय विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेना है। इस कुनबे में हमारे अविभाजित जिला मोहला जैसे वनांचल क्षेत्र से भी कई युवा शामिल हैं।
इन्हीं में एक रोशन प्रसाद ब्यौहरे हैं जो मैकेनाइज्ड इनफेंट्री रेजीमेंट में 24 मार्च 2001 में ज्वाइन हुए। आज भारतीय थल सेना दिवस पर टैंक रेजीमेंट के सदस्य रहे पूर्व सैनिक रोशन प्रसाद से विशेष चर्चा की। जिसमें उन्होंने बताया कि वे अहमदनगर महाराष्ट्र से ट्रेनिंग किए।
हमारी ट्रेनिंग के अंतिम चरण के दौरान भारतीय संसद पर हमला हुआ। जिसके बाद बटालियन में पोस्टिंग कर तत्काल भारतीय बार्डर में तैनात किया गया। हमें सांभा सेक्टर में भेजा गया। यहां कुछ दिन रहने के बाद पठानकोट, जम्मू-श्रीनगर, पटियाला, जोधपुर जैसे अनेक स्थानों में ड्यूटी की। विशेषकर बार्डर क्षेत्र में ज्यादा पोस्टिंग रही।
पूर्व सैनिक ने बताया कि सन् 2008 में हमारी पल्टन फस्ट आर्मी डिविजन पटियाला में पोस्टिंग थी। इस दौरान इंग्लैंड आर्मी की एक कंपनी जो कि अफगानिस्तान से लड़ाई करते हुए थ्री मर्शियन रेजीमेंट थी, ये कंपनी पूरी खत्म हो गई थी।
इस दौरान उनको अपनी ट्रेनिंग के लिए किसी दूसरे की आर्मी की जरूरत थी। उन्हें इंडियन आर्मी की मैकेनाइज्ड इनफेंट्री रेजीमेंट को चुना। जिससे अगस्त 2008 में हम लोगों ने इंग्लैंड में वहां आर्मी के साथ संयुक्त युद्ध अभ्यास किया था। जब हम संयुक्त युद्ध अभ्यास के लिए पहंुचे। इंग्लैंड आर्मी ने एक ट्रेनिंग विलेज बनाया था। इस दौरान आफेंस और डिफेंस करना था।
इस डिफेंसिव अभ्यास में हमें पूरा गांव दे दिया गया था। इसके आपको सुरक्षित करना है और इंग्लैंड आर्मी उस पर अटैक करेगी। अगर हम एक घंटे तक इंग्लैंड आर्मी को होल्ड करके रखते हैं हम जीत जाएंगे और वो अटैक कर दिए तो वो जीत जाएंगे।
मोर्चे पर इंग्लैंड की आर्मी को 8 घंटों तक रोके रखा हम लोगों ने इंग्लैंड की आर्मी को 8 घंटों तक रोके रखा। इस अभ्यास में हमें रात 2 बजे भेजा गया। हम सुबह 10 बजे तक इंग्लैंड की आर्मी को उस युद्ध अभ्यास गांव में प्रवेश नहीं करने दिए। इसके हमारी पारी में इंग्लैंड की आर्मी ने चालाकी दिखाते हुए हमारे सेंसर वाले हथियारों को कोड वर्ल्ड से लॉक कर दिए थे।
मैं रॉकेट लांचर सेक्शन में था। युद्ध अभ्यास के बाद पता चला कि पूरे प्लाटून के हथियार लॉक थे। तब हमारे प्लाटून कमांडर ने कहा था कि ये अंग्रेज हैं कभी भी चीटिंग करने से पीछे नहीं हटते।
