राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा आयोजित सद्भावना
बैठक महर्षि बाल्मीकि सभा गृह राम मंदिर व्ही आई पी रोड रायपुर मैं संपन्न हुआ।
सद्भावना बैठक के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सरसंघचालक माननीय मोहन भागवत जी थे।
छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी समाज के प्रांतीय पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए
माननीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने कहा कि समाज की प्रथम इकाई परिवार है परिवार से ही सद्भाव बैठक की शुरुआत करने से समाज मोहल्ला गांव एवं ब्लॉक कर समाज स्तर पर आपस में बैठकर समाजिक सद्भाव को बढ़ाकर ही हम भारतीय संस्कृति का संवर्धन और संरक्षण कर सकते हैं।

आगामी फरवरी माह में होने वाले प्रत्येक जिला एवं विकास खंड स्तर पर समाजिक सद्भाव बैठक में सभी समाज के पदाधिकारियों को आपस में बैठकर परिवार समाज और देश के हित में चिंतन करते हुए सद्भाव बैठक में उपस्थित होकर अपने विचारों को समाजिक रूप साझा करने से छोटी छोटी समस्याओं का समाधान स्वयं ही हो जाता है।
समाज एवं राष्ट्र हित में सभी समाज प्रमुखों से अपने समाजिक दायित्व का निर्वहन करनी की अपील की।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित प्रांत स्तरीय सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय रजक महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विश्राम निर्मलकर ने कहा अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव हमारा नैतिक जिम्मेदारी विविधता से इंद्रधनुषी भारत का दर्शन होता हैं। भारत अनेक जातियां ,अनेक पंथ अनेकानेक पंथों ,संप्रदायों , मतों की गौरवशाली धरती है।हमें इसमें निहित ज्ञान,दर्शन ,कला , साहित्य,संगीत ,लोक, रीति,रिवाज इनके प्राण है।इस समाजिक ताने बाने में हमारे अमूल्य संस्कृति के प्राण रचे बसे है,जिनका संरक्षण और संवर्धन, हमारी नैतिक,जिम्मेदारी है,इसी में हमारी अतीत, वर्तमान और भविष्य के जीवन मूल्य समाहित है बैठक उपस्थित केसर निर्मलकर प्रदेश संरक्षक गरियाबंद, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर लेखराम निर्मलकर राजनांदगांव, प्रदेश सलाहकार पवन गंगबोईर दल्ली राजहरा, डॉ उग्र सेन कन्नौजे प्रदेशसंयोजक कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ, सुमन कन्नौजे संयोजक महिला प्रकोष्ठ भिलाई, गिरधारी निर्मलकर संयोजक बेमेतरा, परसराम निर्णेजक बिलासपुर, एम आर कौशिक ,लक्ष्मीकांत निर्णेजक, डॉ प्रदीप निर्णेजक, अरुण निर्णेजक, उपस्थित थे उक्त जानकारी प्रदेश महासचिव सुरेश निर्मलकर दिया
