राजनांदगांव, शहर के सुभाष द्वार दिल्ली दरवाजा के पास स्थित 50 साल पुराने ऐतिहासिक गायत्री शक्तिपीठ का वार्षिक उत्सव अनुष्ठानिक आयोजनों के बीच धूमधाम से मना। दो दिवसीय आयोजन में 12 घंटे का सामूहिक अखंड मंत्र जाप और दूसरे दिन रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ यज्ञ कार्यक्रम संपन्न हुआ। महायज्ञ में सैकड़ों गायत्री परिजनों व सत्य सनातन धर्मियों ने विश्व कल्याण की भावना से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुति डाली। आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार के साथ वातावरण यज्ञमयी बना रहा।
शहर के इस गायत्री शक्तिपीठ का भूमिपूजन और मां गायत्री, सावित्री और कुंडलिनी शक्ति की स्थापना अखिल भारतीय गायत्री परिवार के संस्थापक गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा ने स्वयं अपने हाथों से किया गया है। इससे इस शक्तिपीठ का दुनिया भर में महत्वपूर्ण स्थान है। ऐतिहासिक गायत्री शक्तिपीठ का जीर्णोद्धार कर भव्य साज-सज्जा के साथ पुन: प्रतिष्ठापन किया गया जिसमें शहर के धर्म प्रेमी दान दाताओं द्वारा अंश दान दिया गया है। समाज के प्रति सेवा भाव रखने वाले इन विशिष्ट दान दाताओं का वार्षिकोत्सव में सम्मान किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुरोहितों ने किया सम्मान गायत्री मंदिर के पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माथे पर तिलक चंदन लगाकर तथा उन पर पुष्प वर्षा कर अभिनंदन किया गया। वहीं उन्हें मंत्र लिखित पीत दुशाला ओढ़ाकर तथा ऋषि साहित्य, प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज एवं युग संगीत की मधुर स्वर लहरियां दान दाताओं के मन को आनंदित करती रही। विशिष्ट दान दाताओं के सम्मान से माहौल में हर्ष का वातावरण बना रहा। शक्तिपीठ के व्यवस्थापक भाई ओमप्रकाश ने बताया समारोह के अंत में हलवा महाप्रसादी का वितरण किया गया।
शक्तिपीठ को राजस्थान के कारीगरों ने तराशा गायत्री शक्तिपीठ के स्थापना दिवस समारोह को लेकर माहभ से तैयारी की जा रही थी। इसकी खूबसूरती बढ़ाने राजस्थान से पहुंचे कारिगरों ने तेजी से निर्माण काम किया। अनुष्ठान गुरूदेव एवं वंदनीय माता के सूक्ष्म संरक्षण में संपन्न हुआ। पांच कुंडीय महायज्ञ के साथ यज्ञोपवीत, पुसवन, जन्मदिवस, नामकरण एवं विभिन्न संस्कार संपन्न हुए।






