राजनांदगांव 25 मई 2021 : इस माह के पहले सप्ताह की दूसरी तारीख को देश के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आए। नतीजों के आने के बाद बाकी प्रांतों की तो स्थितियां समान रही लेकिन पश्चिम बंगाल से मन को व्याकुल कर देने की खबरें सामने आई। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जिस तरह से हिंसा बेकाबू होते चली गई और आज भी जारी है। मीडिया की रिपोर्ट, स्थानीय नेताओं के बयान, पश्चिम बंगाल के नागरिकों ने इस हिंसा के लिए राज्य के सत्ताधारी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है। यह भी आरोप लगाया कि राज्य के सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को उनके उच्च नेतृत्व से समर्थन भी प्राप्त है।

भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है। संविधान ने पश्चिम बंगाल के निवासियों को भारत के नागरिक होने के नाते लोकतांत्रिक रूप से अपने मताधिकार का उपयोग करने की स्वतंत्रता दी है इस अधिकार का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल के ग्रामीण मतदाताओं अन्य राजनीतिक दलों के समर्थकों एवं तटस्थ लोगों ने अपना मतदान किया। लेकिन नतीजे आने के बाद एक विशेष वर्ग पर हो रही हत्याओं और 100 से अधिक मकानों पर खुलेआम बुलडोजर चलाकर गिरा दिया गया, कई दुकानों को लूट लिया गया। वहां की राजनीति पार्टी के विरुद्ध कार्य करने वाले राजनीतिक दल के सदस्यों के घर में घुसकर मारपीट किया गया, माताओं बहनों के साथ अत्याचार व्यभिचार और हत्या की घटनाएं भी वहां हुई, अगर पीड़ित व्यक्ति इस घटनाओं का रिपोर्ट लिखाने थाने में पहुंच जाता है तो उस स्थिति में रिपोर्ट भी दर्ज नहीं किया जा रहा है।
इन घटनाओं की पुष्टि भी हुई है। नंदीग्राम जैसे विधानसभा क्षेत्र में 40 से अधिक घरों को बुलडोजर चलाकर गिरा दिया गया है। बंगाल की कानून व्यवस्था समाप्त हो चुकी है साथ ही साथ लगभग डेढ़ लाख लोग वहां से पलायन कर चुके हैं। साथ ही अन्य पार्टी से जीत कर आए कार्यकर्ताओं के पार्टी दफ्तरों पर भी आगजनी की गई और कई ऐसे मतदाता हैं जिन्हें निर्वस्त्र कर हाथ पैर बांधकर मारपीट करके फांसी पर लटका दिया गया है। ऐसा घृणित कार्य वहां की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आज बंगाल विभाजन की ओर अग्रसर हो रहा है और इसका परिणाम संपूर्ण भारत को भुगतना पड़ेगा और तो और हिंसा ऐसे स्थानों पर अधिक पाई गई जहां से …
★ तृणमूल कांग्रेस पार्टी के विधायक अधिक जीत कर आए है, ऐसी सभी विधानसभा क्षेत्र जहां तृणमूल कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अधिक से अधिक जीत कराएं उनकी कुल संख्या 33 सुनिश्चित की गई है।
★ कई तृणमूल कांग्रेस के विधायक इसमें अभियुक्त एवं संदेह के दायरे में पाए गए हैं। जो कि यह हिंसा के मूल रूप से बंगाल में हुई है । इसमें प्रमुख है शौकत मौला जो कि उसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। महिलाओं के विरुद्ध गैंगरेप और हिंसा के कई केस पंजीकृत किए गए हैं।
★ बंगाल में हिंदू देवी देवताओं की मूर्ति एवं मंदिरों की तोड़फोड़ की गई है।
वह क्षेत्र जहां से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जीत कर आए हैं ऐसे स्थानों पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता ने अधिक से अधिक हिंसा करने का प्रयत्न किया ऐसे कुछ क्षेत्र जैसे नंदीग्राम ,नाताबारी है।
★ पश्चिम बंगाल में 23 महत्वपूर्ण जिलों में से 16 ऐसे जिले आते हैं जो बहुत बुरी तरह से हिंसा से प्रभावित रहे हैं। जो जिले बुरी तरह से प्रभावित रहे इसमें से ध्यान देने योग्य बात है 9 जिले जहां एक समाज विशेष अर्थात मुस्लिम जनसंख्या जिनकी जनसंख्या 25% से अधिक है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि इन सब हिंसा एवं बुरे व्यवहार से पश्चिम बंगाल की पुलिस एवं प्रशासन का अभी तक इसमें पूरा योगदान रहा है और उन्होंने इन सभी घटनाओं के विरुद्ध में किसी प्रकार का कोई एक्शन नहीं लिया और संलिप्त लोगों के विरुद्ध कोई कार्यवाही भी नहीं की गई।
इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए आज लोकतंत्र रक्षा मंच राजनांदगांव के द्वारा जिलाधीश राजनांदगांव को महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम से ज्ञापन सौंपा गया।
यह मंच सकल हिंदू समाज, राजनांदगांव जिला के प्रबुद्ध नागरिक गण, चिकित्सक, अधिवक्ता, व्यवसायी, शिक्षक, इंजीनियर व सामाजिक बंधु जो समाज का नेतृत्व करते है जिनमें साहू समाज विश्वकर्मा समाज सिन्हा समाज, पनिका समाज सोनी समाज ब्राह्मण समाज व अन्य समाज के प्रमुख लोगों ने इस हिंसा और पलायन के विरुद्ध लोकतंत्र रक्षा मंच को महामहिम राष्ट्रपति की तक अपनी बात रखने का माध्यम बनाया है उपरोक्त विषय की जानकारी लोकतंत्र रक्षा मंच के जिला संयोजक श्री महेश उत्तलवार ने दी।
