भिलाई। कोरोना की दूसरी लहर से दुर्ग जिला अभी पूरी तरह से उबर भी नहीं पाया है कि लोगों ने फिर से लापरवाही शुरू कर दी है। अक्षय तृतीया के बाद से शादियों का दौर शुरू हो गया है। प्रशासन ने अधिकतम 10 लोगों की मौजूदगी में शादी करने का आदेश दिया है।
लेकिन, ये आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित है। अभी जिन भी घरों में शादियां हो रही हैं। वहां पर 200 से 300 लोगों की भीड़ जुट रही है। बाकायदा बारात निकाली जा रही है और पार्टियों का भी आयोजन किया जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे फिर कोरोना विस्फोट हो सकता है।
शहर में इसी तरह से भीड़ जुटाकर हो रही कुछ शादियों की जानकारी देने के लिए एडीएम ऋचा चौधरी को फोन किया गया। लेकिन, हैरानी की बात ये है कि उन्होंने फोन तक नहीं उठाया।
कोरोना की दूसरी लहर को नियंत्रित करने में सिर्फ प्रशासनिक दक्षता ही नहीं, बल्कि आम लोगों का संघर्ष भी रहा है। कलेक्टर ने सख्त लाकडाउन का आदेश जारी किया। लेकिन, उसके चलते आम जनता ही परेशान हुई। इतनी परेशानी झेलने के बाद अभी जिले की स्थिति संभल रही है।
लेकिन, शादियों के चलते फिर से हालात बेकाबू हो सकते हैं। प्रशासन ने आदेश जारी किया है कि परिवार के सिर्फ 10 लोगों की मौजूदगी में शादी होगी। किसी प्रकार का समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा। लेकिन, वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। भिलाई-दुर्ग सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी कई शादियां हो रही हैं और कहीं भी आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है।
दुर्ग और भिलाई में रविवार को कई शादियां हुईं। बैंड-बाजे के साथ बारात निकाली गई। घरों के सामने मंडप लगे और बारातियों की पूरी खातिरदारी भी हुई।
किसी भी स्थान पर लोगों ने कोरोना को नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन तक नहीं किया। न दूल्हा मास्क में दिखा और न ही अन्य लोग। यदि आने वाले कुछ दिनों में फिर से संक्रमण बढ़ता है तो उसके लिए ये शादियां भी काफी हद तक जिम्मेदार हो सकती हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को छोड़कर किसी भी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शाम के बाद ड्यूटी पर नजर नहीं आते हैं। जबकि निकाय क्षेत्रों में निगम और नगर पालिका की टीम इस पर नकेल कस सकती है।
लेकिन, शाम पांच बजे के बाद निकाय के कर्मचारियों की छुट्टी हो जाती है और उनकी छुट्टी के बाद शादी का माहौल शुरू होता है। ऐसे में संक्रमण की नियंत्रित स्थिति को बनाए रख पाना संभव नहीं होगा।
