राजनांदगांव। वैश्विक महामारी में मानवता भी मरी हुई नजर आ रही है। मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जिसमें एक पिता अपने बेटे के अंतिम संस्कार के लिए गिड़गिड़ता रहा। क्योंकि पिता के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे।
श्रमिक बहुल वार्ड राजीव नगर में रहने वाले 17 वर्षीय इंदचंद सारथी का शनिवार को आकस्मिक निधन हो गया। स्वजन अंतिम संस्कार के लिए मठपारा स्थित मुक्तिधाम लेकर पहुंचे। घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि 2100 रुपये मुक्तिधाम समिति में अंतिम संस्कार के लिए दे सकें। स्वजनों ने अंतिम संस्कार के लिए 2100 रुपये नहीं होने की बात कही। और मुक्तिधाम समिति से निश्शुल्क सेवा की मांग की।
लेकिन मुक्तिधाम समिति ने बिना पैसा जमा किए अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी-कंडा देने से इंकार कर दिया। मुक्तिधाम समिति ने किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं किया। मृतक के स्वजन गिड़गिड़ाते रहे। लेकिन मुक्तिधाम समिति का दिल नहीं पसीजा। जिसके बाद वार्ड के पार्षद त ऋषि शास्त्री ने चंदा एकत्रित कर शव का अंतिम संस्कार कराया।
लाकडाउन के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। मृतक इंदरचंद के पिता शिव प्रसाद सारथी भी शारीरिक कष्ट के बावजूद रोजी-मजूदरी का अपने परिवार को चला रहा था। साथ ही बेटे का इलाज भी करवा रहा था। लाकडाउन के चलते रोजी-मजदूरी पूरी तरह से बंद है।
जिसके चलते पिता के पास बेटे का अंतिम संस्कार के लिए 2100 रुपये नहीं था। पार्षद ने चंदा एकत्रित कर शव का अंतिम संस्कार कराया। मृतक कुछ दिनों से बीमार चल रहा था। मुक्तिधाम समिति द्वारा सहयोग नहीं दिए जाने पर पिता ने कहा कि मानवता पूरी तरह से मर चुकी है।
पार्षद ऋषि शास्त्री ने इस संबंध में कलेक्टर को पत्र लिखा है। पत्र लिखकर गरीब परिवार जिनके पास अंतिम संस्कार राशि न हो। ऐसी परिस्थितियों में मुक्तिधाम में तत्कालिक व्यवस्था बनाने की मांग की है। साथ ही ऐसे संस्था जो अपने कर्तव्य सेवा को भूलकर दैनिय परिस्थिति में जरुरतमंदों की सेवा न कर सकें ऐसे सेवा भावी संस्थाओं पर कार्रवाई करने की भी मांग की है।
