राजनांदगांव। कोरोना संकटकाल में एंबुलेंस कर्मचारी देवदूत बनकर मरीजों को समय में अस्पताल पहुंचाने की सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्करों के साथ एंबुलेंस और मुक्ताजंलि वाहन के कर्मचारी भी कोरोना काल में महत्वपूर्ण भूमिका में है।
रात हो चाहे दिन हर पल एंबुलेंस कर्मी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। खुद की परवाह ना कर संक्रमित मरीजों को भी एंबुलेंस कर्मी अस्पताल पहुंचा रहे हैं। वहीं स्थिति गंभीर होने पर रायपुर और भिलाई भी रेफर लेकर जा रहे हैं। रास्ते में किसी तरह की दिक्कत होने पर भी एंबुलेंस कर्मी प्राथमिकी तौर पर उपचार कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस में आक्सीजन भी मरीजों को लगा रहे हैं।
जिले में कुल 17 संजीवनी एंबुलेंस हैं, जिसमें 80 कर्मचारी है। इसमें 40 पायलट और 40 इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) के कर्मचारी 24 घंटे सेवाएं दे रहे हैं। जो खुद के साथ परिवार की फ्रिक छोड़कर जान जोखिम में डालकर सेवाएं दे रहे हैं।
फोन पर लोकेशन मिलते ही कर्मचारी मरीजों को बचाने के लिए एंबुलेंस लेकर दौड़ रहे हैं। कर्मचारियों पूरी जिम्मेदारी के साथ मरीजों को सही समय में अस्पताल पहुंचाने की कोशिश में रहते हैं। इस बीच कोई ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है तब भी सेवाएं देने का काम करते हैं।
जिले में कोरोना की दूसरी लहर मार्च माह से शुरू हुई। दूसरी लहर में मार्च से 15 मई तक संजीवनी 108 के कर्मचारी करीब 4699 मरीजों को अस्पताल पहुंचा कर उनकी मदद कर चुके हैं। इनमें 1250 कोरोना संक्रमित मरीज हैं, जिन्हें कोविड केयर सेंटर के अलावा पेंड्री स्थित कोविड अस्पताल पहुंचाएं। वहीं गंभीर मरीजों के रेफर होने पर उन्हें रायपुर एम्स और अन्य निजी अस्पताल तक भी पहुंचाने की सेवाएं दी है।
एंबुलेंस कर्मचारी संक्रमित मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के समय पर पीपीइ कीट से अपनी सुरक्षा करते हैं। इसके अलावा मास्क और हैंडग्लब्स, सैनिटाइजर करते हैं, ताकि वो भी संक्रमण की चपेट में ना आए। एंबुलेंस के इएमटी कर्मचारी सुरेश साहू व रोशन कुमार ने बताया कि संक्रमित मरीजों को अस्पताल लाने के समय पर काफी एहतियात बरतना पड़ता है।
आक्सीजन लेबल कम होने वाले गंभीर मरीजों को एंबुलेंस में ही आक्सीजन देना पड़ता है। प्राथमिकता के आधार पर मरीजों की जान बचाना ही कर्तव्य हैं। स्वास्थ्य सेवा के लिए एंबुलेंस कोरोना काल में दिन-रात दौड़ रही हैं। किसी भी समय सूचना मिलने पर संक्रमितों को लेने और वापस ले जाने के लिए कर्मचारी तैयार रहते हैं। जिनमें सबसे ज्यादा चक्कर 108 संजीवनी एक्सप्रेस दौड़ रही है।
मुक्तांजलि वाहन के चालकों को भी तैनात रहना पड़ रहा है। मार्च और मई माह के बीच में कोरोना ने जिले में जो ताडंव किया है, जिसमें तीन सौ कोरोना संक्रमितों की मौत हुई है। संक्रमित मरीजों की मौत के बाद उन्हें घर या फिर मुक्तिधाम ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन के कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
मृत व्यक्ति के शव को कोविड अस्पताल से उनके स्वजनों तक और फिर पीपीई कीट की प्रक्रिया पूरी कर शव को सुरक्षित परिजनों को सौपने के काम में लगी है। इसके चालक संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षा बरतने का प्रयास करते है। मृतको को अस्पताल से लेकर उनके घर पहुंचाकर पूरी एंबुलेंस के साथ खुद को सैनिटाइज कर चालक संक्रमण से बच रहे हैं।
