राजनांदगांव। पेंड्री स्थित मेडिकल कालेज कोविड अस्पताल में जिले के जेलों में कोरोना संक्रमित मिले बंदियों को भी इलाज के लिए भर्ती किया गया है।
लेकिन अस्पताल में बंदियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन अनदेखी कर रही है। सुरक्षा के नाम पर पुलिस अस्पताल के गेट पर 21 जवानों की शिफ्टवार ड्यूटी जरूर लग रही है, पर गेट में जवान नहीं दिखते। ऐसे में संक्रमित बंदियों का अस्पताल से फरार होने की संभावना बढ़ गई है।
क्योंकि अस्पताल में संक्रमित मरीजों के साथ वैक्सीनेशन के लिए भी भीड़ लग रही है। बंदी इस भीड़ की आड़ तक ले सकते है। बड़ी बात तो यह है कि अस्पताल में आने-जाने के कई रास्ते हैं। अगर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा पर अनदेखी की तो बंदी फरार हो सकते हैं।
संक्रमित बंदियों की सुरक्षा जरूरी
कोरोना संक्रमित बंदियों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन शिफ्टवार ड्यूटी कर रहे जवान इस ओर लापरवाही कर रहे हैं। जिन गेट पर जवानों की ड्यूटी लगाई गई है, जवान से वहां नजर नहीं आ रहे हैं। मेडिकल अस्पताल में 21 बंदी भर्ती हैं। यहां की अव्यवस्था के चलते बंदियों के लिए जगह सुरक्षित नहीं है।
आसानी से हास्पिटल से कोई भी बंदी फरार हो सकता है। अस्पताल प्रबंधन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जेल और पुलिस प्रशासन को मौखिक जानकारी दी है।
वैक्सीनेशन के लिए लग रही भीड़
मेडिकल कालेज में वैक्सीनेशन का काम भी चल रहा है। इसके कारण अस्पताल परिसर में लोगों की बड़ी संख्या में भीड़ जुट रही है। संक्रमित भर्ती इस भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो सकते हैं। पीपीइ कीट या वैक्सीनेशन के लिए आए लोगों की भीड़ में खड़े होकर संक्रमित बंदी बाहर निकल सकते हैं।
संक्रमित बंदियों में खैरागढ़ सलोनी उपजेल के ज्यादा बंदी है। वहीं जिला जेल के भी बंदी हैं। बताया गया कि ज्यादा संक्रमित बंदी दुष्कर्म, हत्या व चोरी के आरोप में जेल गए हैं। इनके भागने से तैनात जवानों की सुरक्षा पर सवाल उठ सकता है।
इस संबंध में एएसपी कविलाश टंडन ने कहा कि कोरोना पाजिटिव बंदियों की सुरक्षा के लिए कोविड हास्पिटल के गेट पर जवानों की ड्यूटी लगाई जा रही है। अगर जवान अनदेखी कर रहे हैं, तो उन्हें बंदियों की सुरक्षा को लेकर समझाया जाएगा। किसी तरह की लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।
