रायपुर। राजधानी रायपुर में कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वजनों को रेमडेसिविर इंजेक्शन दिलाने के एवज में मनमाना हजारों रुपये वसूलने वाले पांच और आरोपित पुलिस के निशाने पर हैं। इनमें निजी अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी, दवा दुकानदार और दवा कंपनियों के एमआर शामिल हैं।
पिछले महीने भर में रायपुर पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले 23 लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दर्जन भर से अधिक रेमडेसिविर इंजेक्शन और इंजेक्शन बेचकर कमाए गए लाखों रुपये नकदी बरामद किया है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई चौकाने वाले राज सामने आए हैं। आरोपितों के नाम भी खुलते गए। इस आधार पर पुलिस अन्य की तलाश कर रही है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते केस के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी भी बढ़ रही है। पैसा कमाने के लालच में निजी अस्पताल के कर्मचारी, दवा कंपनियों से जुड़े लोग और कुछ छोटे दवा दुकानदार रेमडेसिविर इंजेक्शन कालाबाजारी में लिप्त है। कोरोना मरीज की जान बचाने के लिए स्वजन कालाबाजारियों के चंगुल में फंसकर चार से दस गुना दाम पर इंजेक्शन खरीदने को विवश है।
मौदहापारा, सरस्वतीनगर और आजादचौक इलाके से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते पकड़े गए राहुल गोयदानी, आयुष माहेश्वरी, कमलेश रतलानी, सुमित मोटवानी, दवा दुकानदार रोहित क्षेत्रपाल, वैभव साहू और दवा प्रतिनिधि ओंकार भोसले से पूछताछ में कुछ लोगो के नाम सामने आए है। इन सभी की तलाश की जा रही है। पुलिस की टीम निजी अस्पतालों और दवा दुकानों के आसपास सक्रिय कालाबाजारियों पर नजर रख रही है।
