राजनांदगांव । शहर से लगे ग्राम लिटिया में इस वर्ष भी ईकोफ्रेंडली होली जलाई जाएगी। वैदिक होली की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गांव में गोवर के कंडे गोघृत व हवन संविधा के साथ ही होलिका दहन किया जाएगा। इसे लेकर गांव में तैयारी की जा रही है। साथ ही प्राकृतिक रंगों से होली खेलने के लिए लोगों को प्रेरित भी किया जा रहा है। रविवार यानी 28 मार्च की रात होलिका दहन है। इसे लेकर पूरे जिले में जोरदार तैयारी की जा रही है। लिटिया में कई वर्षों से पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए ईकोफ्रेंडली होली जलाई जा रही है। इसके माध्यम से लोगों को वैदिक होली का तो संदेश दिया ही जा रही है, साथ ही साथ पर्यावरण संरक्षण से भी लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
0 नई पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास शहर के नजदीक ग्राम लीटिया में मां पंचगव्य अनुसंधान केंद्र द्वारा देसी गोवंश के गोवर के कंडों व अन्य औषधीय गोघृत व हवन संविधा द्वारा पवित्र, प्रभावशाली और पर्यावरण रक्षक होलिका दहन की व्यवस्था की गई है। बताया जा रहा है कि वैदिक काल में गाय के गोबर से व औषधीय लकडियों से ही होलिका दहन किया गया था। आज वह परंपरा देखने को नहीं मिलती। केंद्र इस परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने में लगी है।
0 वैदिक होली के कई फायदे अनुसंधान केंद्र के प्रभारी आर्य प्रमोद ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण व कोरोना वायरस के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए आज वैदिक होली की नितांत आवश्यकता है। अपरिपक्व वृक्षों को काटकर होली जलाई जाती है जो काफी प्रदूषणकारी होती है। वहीं अन्य प्रदूषणकारी टायर-ट्यूब व पालीथिन आदि को भी होलिका दहन के लिए उपयोग किया जाता है, जो पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
वैदिक होली जलाने से वृक्ष तो बचेंगे ही। साथ ही बेसहारा गायों की भी रक्षा होगी और पर्यावरण भी प्रदूषण व वायरस मुक्त होगा। यह जानकारी देकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंनें बताया कि होलिका दहन के बाद जो राख निर्मित होगी, वह पूरी तरह से औषधीय गुणों से युक्त होगी जिसे छानकर दूसरे दिन रंग गुलाल की जगह उपयोग किया जाएगा। यह विभिन्ना चर्मरोगों को दूर करेगा और केमिकल रंगों के दुष्प्रभाव को भी खत्म करेगा।
0 दीये व राखी भी गोबर के मां पंचगव्य अनुसंधान केंद्र गोबर के कई उत्पाद तैयार करने के मामले में प्रसिद्ध हो चुका है। केंद्र में गोबर से ही भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इसे छत्तीसगढ़ के कई शहरों के अलावा महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश भी भेजी जाती है। राखी भी गोबर से बनाकर लोगों को गोवंश की रक्षा के लिए संदेश दिया जाता है। बेहद कम कीमत पर सारे उत्पाद बेचे जाते हैं। इसकी सराहना कई संस्था-संगठनों की तरफ से की जा चुकी है।
