डोंगरगांव । नगर के सरकारी अस्पताल में अव्यवस्था का आलम है। लंबे समय से चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। यहीं नहीं अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। अस्पताल में कर्मचारियों की भी मनमानी चल रही है। जिसका खामियाजा मरीजों व उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। अनदेखी के चलते अस्पताल कराह रहा है। सरकारी अस्पताल में व्यवस्था दुरुस्त करने विभागीय अधिकारी भी कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कई बार शिकायत भी हो चुकी है। लेकिन आज पर्यंत तक स्थिति जस की तस है।
0 शिकायतें दरकिनार राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण व हाइप्रोफाइल डोंगरगांव में गुरुवार को लंबे अरसे बाद कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा का आगमन हुआ। रेस्ट हाउस में आगमन के दौरान उनसे जनप्रतिनिधियों तथा मीडियाकर्मियों द्वारा सरकारी अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था, जन औषधि केंद्र के संचालन में बरती जा रही घोर लापरवाही सहित अन्य मुद्दा उठाया गया। लेकिन कलेक्टर ने सारी शिकायतों को दरकिनार कर दिया और इस संबंध में किसी तरह का अधिकारिक बयान भी देने से इंकार कर दिया। जिससे कलेक्टर के आगमन व निरीक्षण के बाद अस्पताल की व्यवस्था सुधरने की आस संजोये जनप्रतिनिधियों में जमकर नाराजगी दिखी।
ज्ञात हो कि इन दिनों पूरे जिले में डोंगरगांव का सरकारी अस्पताल और यहां की अव्यवस्था प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। बीएमओ के कभी भी लंबी छुट्टी पर चले जाने से उत्पन्ना अव्यवस्था, कमीशनखोरी के चक्कर में अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र की दवाइयों की कमी, शासन प्रशासन के निर्देश के बाद भी द्वितीय पहर में ओपीडी का न खुलना, स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी सहित ऐसे अनेक मुद्दे हैं। जिनकी शिकायतें शासन प्रशासन स्तर तक होने के बाद भी आज पर्यन्त अस्पताल की खामियों को दूर करने किसी तरह की कोई पहल नहीं हो रही है। गुरुवार को कलेक्टर अचानक यहां पहुंचे तो लोगों को थोड़ी उम्मीद जगी थी। लेकिन रेस्ट हाउस से मात्र दस कदम की दूरी पर स्थित सरकारी अस्पताल न पहुंचकर कलेक्टर ने नए बन रहे सरकारी अस्पताल की खाली बिल्डिंग के साथ तहसील कार्यालय और कन्या हाईस्कूल में आगामी दिनों में खुलने वाले स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी मीडियम स्कूल के खाली पड़े भवन का निरीक्षण करना ज्यादा उपयुक्त समझा।
अनुरोध में बाद भी नहीं गए अस्पताल गुरूवार को नगर में पहुंचे कलेक्टर से जब नगर के पत्रकारों ने स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की खामियों पर चर्चा की, तो कलेक्टर वर्मा गोलमोल जवाब देते नजर आए। वहीं जन औषधि केंद्र ना खुलने की जानकारी देने पर केवल इतना कहा कि एक दो दिन में व्यवस्था सुधर जाएगी। उनसे जब अस्पताल पहुंचने का अनुरोध किया गया तो वे टालकर अन्यंत्र चले गए। इधर, सरकारी अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था व कमियों को मुद्दा बनाते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने अब आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। मंडल भाजपा अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सारी व्यवस्था नहीं सुधरी तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।
