राजनांदगांव । जिला न्यायालय परिसर में मंगलवार को महिलाओं व बच्चों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। एक दिवसीय इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता जिला विधिक सेवा प्राधिकारण सचिव प्रवीण मिश्रा ने। उनके साथ महिला व बाल विकास के डीसीपीओ चंद्रकिशोर लाडे, सखी वन स्टाप सेंटर के केंद्र प्रशासक गायत्री साहू के अलावा बालक और बालिका संप्रेषण गृह, दत्तक ग्रहण संस्था के सभी कर्मचारी मौजूद थे।
मिश्रा ने कहा कि सामाजिक परिदृश्य को देखते हुए आज हम सभी को महिलाओं व बच्चों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होना होगा। जनजागृति हर मानव के मन में लानी होगी। हम सभी को मिलकर यह प्रयास करना होगा और उस प्रयास को सार्थक भी करना होगा कि महिलाओं व बच्चों के प्रति किसी भी प्रकार कर दुर्व्यवहार समाज में गतिशीन अवधारणाएं के रूप में प्रवाहित न हो और संविधान की मूल आत्मा को लागू कर महिलाओं ओर बच्चों की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करें। उनके लिए भय मुक्त समाज का निर्माण करें।
सभ्य समाज में हिंसा का कोई भी स्थान नहीं हो सकता, लेकिन अगर अपवादित रूप से समाज में हिंसात्मक घटना होती भी है तो उनकी रोकथाम या दंड देने के लिए विधियां भी सभ्य समाज में प्रर्वतनीय होती है। सचिव ने छत्तीसगढ़ राज्य की हमर अंगना योजना ओर घरेलू ंहिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को प्राधिकरण ने निश्शुल्क विधिक सहायता भी अविलंब प्रदान की जाती है। इसके अलावा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर की नवीन योजना ‘करूणा’ जो सभी जिलों में प्रभावशील, जिसकी जानकारी दी। सचिव मिश्रा ने कहा कि इस योजना के तहत वरिष्ठजन को निश्शुल्क सहायता प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत सभी उन वृद्धजनों को चिन्हांकित किया है, जिनके संतान अपने ही माता-पिता को घर से निकाल दिया है। जिला व सत्र न्यायाधीश विनय कुमार कश्यप ने कहा कि न्याय सबके के लिए है और न्याय की अवधारणा किसी भी प्रकार का न्याय प्रदान करने में कोई भेदभाव नहीं करती है।
