राजनांदगांव । कोरोना की महामारी ने लोगों की जिंदगी बदल दी। आर्थिक संकट के बीच लोगों के खान-पान का तरीका बदल गया। महामारी ने कई रिश्ते भी बदल दिए। कोरोना काल में आयुर्वेद की मांग भी तीन गुणी हो गई। संक्रमण ने कई परिवार को भी बिखेर दिया। कई परिवारों के लिए कोरोना आफत से कम नहीं था। संकटकाल में परिवार के सदस्य छोड़कर चले गए। ऐसे समय में भी कई लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। शहर के बल्देव बाग में रहने वाली 74 वर्षीय निर्मला पंसारी ने कोरोना को हंसते-हंसते हरा दिया। 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहकर निर्मला ने अपने परिवार के सदस्यों को संक्रमण से लड़ने की सीख दी। और आखिर में वो कोरोना से जंग जीत ली।
कोरोना को हराने के बाद भी उन्होंने संकटकाल में बदले जीवनशैली को बनाए रखा। आज भी वो सुबह उठकर योग करती है, काढ़ा पीती है। निर्मला ने बताया कि कोरोना काल में उनके कई रिश्तेदार पूरे परिवार से दूर हो गए थे। अब जब संक्रमण फिर से बढ़ने लगा है तो लोग उसी नजर से देख रहे हैं, जैसे संक्रमित है।
टूट गया परिवार शहर के लखोली सेठी नगर के 40 वर्षीय संतोष यादव की कोरोना से मौत के बाद उसके परिवार के आठ से दस लोग भी संक्रमित हो गए। चार दिनों बाद संतोष के पिता की भी कोरोना से मौत हो गई, जिसके बाद मानों पूरा परिवार टूट गया। सालभर पहले की इस घटना को याद कर आज भी यादव परिवार के लोगों सहम उठते हैं। संतोष की पत्नी ने बताया कि पति की मौत के बाद अब परिवार की जिम्मेदारी उस पर आ गई है। लेकिन उसने हार नहीं मानी है। परिवार के पालन के लिए वो कोरोना संक्रमण के बीच रोजी-मजदूरी कर घर चला रही है।
