राजनांदगांव । कोरोना काल में फर्नीचर और मध्या- भोजन के लिए बर्तन की खरीदी मामले में शिक्षा विभाग कठघरे में है। इन मामलों में शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। अधिकारी-कर्मचारियों को अधिक वेतन भुगतान करने के मामले में भी शिक्षा विभाग की जमकर किरकिरी हुई। घुमका ब्लाक के चंवरढाल मिडिल स्कूल में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले की विभागीय जांच में लीपापोती कर भी शिक्षा विभाग के अफसरों में गंभीर आरोप लगा। अब शिक्षा विभाग बर्तन खरीदी के मामले में कठघरे में आ गया है। इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई थी। पीएम कार्यालय ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को मामले की जांच कर रिपोर्ट पीजीपीएमओ पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। मामले में कई अफसरों पर गाज भी गिर सकती है।
जिले के 1491 शासकीय स्कूलों में मध्या- भोजन बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने किचन डिवाइस खरीदी की है। इसके लिए 74.55 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। इस राशि से हर स्कूल के लिए पांच हजार रुपये के बर्तन की खरीदी की गई। इसमें प्रेशर कुकर, कड़ाही, तगाड़ी, जग और भगोना आदि शामिल हैं। बर्तन की खरदी से पहले स्कूलों में क्रय समिति का गठन और मांग पत्र लिया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। छग भंडार क्रय नियम को दरकिनार कर खरीदी की गई। बर्तनों का वजन बिल में दर्शाए गए वजन से कम मिला। क्वालिटी भी घटिया मिली। इसे लेकर ही डीईओ के खिलाफ राज्य व केंद्र सरकार से शिकायत की गई थी।
इन मामलों में भी लगे आरोप : शिक्षा विभाग पर स्कूलों के लिए फर्नीचन खरीदी को लेकर भी आरोप लगा। हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम ने विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों को 12 फीसद की जगह 21 फीसद अतिरिक्त वेतन भुगतान कर आरोप से घिरे। जनवरी में घुमका ब्लाक के चंवरढाल मिडिल स्कूल में नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के मामले में भी शिक्षा विभाग की भूमिका संदिग्ध है। विभागीय जांच का आज तक पता नहीं है। हालांकि पुलिस ने आरोपित दुर्गेश यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
इस मामले में डीईओ एचआर सोम ने कहा कि नियमों के तहत की खरीदी की गई है। क्वालिटी भी मापदंड के हिसाब से ही है। अधिक वेतन का भुगतान लिपिक की लापरवाही के कारण हुआ था, जिस पर उसे निलंबित कर दिया गया है। बेवजह आरोप लगाकर इन मामलों की शिकायत की गई है। जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा।
