राजनांदगांव. शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग द्वारा संस्था प्राचार्य डॉ. बी.एन. मेश्राम एवं विभागाध्यक्ष डॉ. के.एन. प्रसाद के प्रमुख दिशा निर्देशन में विभाग की अकादमिक परिषद के द्वारा विषय विशेषज्ञ व्याख्यान माला आयोजित की गई। इस अकादमिक व्याख्यान माला के प्रथम पुष्प के रूप में स्थानीय शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष कृ़ष्ण कुमार द्विवेदी ने सामयिक महत्व के विषय ”भूगोल का भावी स्वरूपÓÓ पर ऑनलाईन विचार व्याख्यान दिया गया।
प्राध्यापक द्विवेदी ने विषयक छात्रों को बताया कि वृहद ज्ञानकोषीय प्रकृति वाला भूगोल विषय स्थायी स्वरूप का होते हुए भी परिवर्तनशील विषय है। भूगोल की यही परिवर्तनशीलता, गतिशीलता इसे जीवंत बनाये रखते हुए भविष्य का आधार अध्ययन विषय बनायेगी। भूगोल का भावी स्वरूप भौगौलिक परिस्थितियों में होने वाले सतत् परिवर्तनों से निर्दिष्ट होता है तथा समस्त विषयों के अध्ययन में व्यवहारिक उपयोग तथा विकास की दृष्टि से आधार विषय बनेगा। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने भौगौलिक परिस्थितियों में होने वाले परिवर्तनों विशेषकर जनसंख्या वृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों में लगातार कमी होना, ऊर्जा संसाधनों की कमी, पर्यावरण असंतुलन तथा बढ़ते प्राकृतिक प्रकोपों के परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट किया कि भूगोल का समग्र अध्ययन अधिक वैज्ञानिक, कम्प्यूटर आधारित होगा तथा जीआईएस, सुदूर संवेदन तकनीक का भूगोल के अध्ययन में बढ़ावा मिलेगा। मानव कल्याणकारी शोधों में वृद्धि होगी। रोजगार में भी भूगोल अध्येताओं की महता और उपयोगिता बढ़ेगी। वस्तुत: भूगोल का अध्ययन समस्त भौतिक विज्ञानों, सामाजिक विज्ञानों के अध्ययन का मुख्य आधार बनेगा। व्याख्यान में सहभागी विषयक छात्रों ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से व्याख्यान में सक्रिय सहभागिता की। व्याख्यान का सफल संचालन एवं समन्वय डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा किया गया।
