रायपुर। भारतीय संस्कृति में चिकित्सकों को देव तुल्य माना गया है। ऐसे में जब राजनांदगांव के सरकारी मेडिकल कालेज अस्पताल में मरीज की मौत के बाद स्वजनों द्वारा डाक्टर से मारपीट और तोड़फोड़ की घटना सामने आती है तो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। संस्कारधानी में बुधवार को देर रात हुई इकलौती घटना नहीं है। डाक्टरों के साथ इस तरह दुर्व्यवहार की ऐसी घटनाएं आए दिन प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में सामने आ रही हैं। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए निजी अस्पताल प्रबंधन तो लगभग हर वार्ड के द्वार पर सुरक्षा गार्ड नियुक्त करने लगे हैं।
सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था सुधारने के लिए गंभीरता से काम किए जाने की जरूरत है। एम्स जैसे केंद्रीय प्रबंधन वाले अस्पतालों में एक मरीज के साथ एक ही सहयोगी को अस्पताल में प्रवेश मिलता है। अन्य सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा को ऐसे ही कड़े और सख्त निर्णय लेने में देरी उचित नहीं है। यहां बात सिर्फ अस्पताल में सुरक्षा को लेकर ही नहीं है। अपने आप को भी टटोलने की जरूरत है। बीमारी के कारण हालात बेकाबू होने पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीज के स्वजन आखिर चिकित्सकों से क्या उम्मीद करते हैं।
राजनांदगांव की घटना में 75 वर्षीय बुजुर्ग को गंभीर स्थिति में अस्पताल ले जाया गया था। हालत को देखकर जूनियर डाक्टर ने उन्हें तुरंत वेंटिलेटर में शिफ्ट किया और किसी अन्य अस्पताल में ले जाने का सुझाव भी दिया था। मृतक को किडनी और हार्ट से जुड़ी बीमारियां थीं। उनका डायलिसिस भी किया जा रहा था। अस्पताल में हंगामा करने और डाक्टर पर हाथ उठाने के हिमायती लोगों को गंभीरता से विचार करते कि ऐसी हरकत के कारण सरकारी संस्थाओं में गंभीर मरीजों के दाखिले में मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
जब तक हम अस्पताल में डाक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तब तक अपने मरीज के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और सेवाओं की उम्मीद नहीं कर सकते। एक तथ्य यह भी है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में इलाज करने वाले डाक्टर ही मरीजों के लिए जीवन की उम्मीद होते हैं। निजी अस्पतालों में आर्थिक रूप से बुरी तरह निचोड़े जाने के बाद सरकारी अस्पताल पहुंचने और वहां से स्वस्थ होने के आसपास के मामलों पर गौर करने की जरूरत है।
तोड़फोड़ की हर घटना के बाद अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किए जाने की मांग होती है, लेकिन होता कुछ नहीं। सरकार की तरफ से सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में भी चिकित्सकीय टीम से दुर्व्यवहार के अनेक उदाहरण हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था आज भी संतोषप्रद नहीं है।
डाक्टरों समेत स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को कारगर कदम उठाने चाहिए।जब तक हम अस्पताल में डाक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तब तक अपने मरीज के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और सेवाओं की उम्मीद नहीं कर सकते।
