राजनांदगांव । कोरोना महामारी के कहर को यादकर आज भी शहरवासियों के जेहन में कंपकंपी आ जाती है। पूरे देश में लाकडाउन था। शहर भी रेड जोन में था। शहर के हर वार्ड में कोरोना मरीज थे। करीब ढाई से तीन हजार लोग होम आइसोलेशन में थे। संक्रमण के डर से परिवार के लोग भी मरीजों के पास जाने से डरते थे। ऐसे संकट काल शहर की स्वच्छता दीदियों ने जो हिम्मत दिखाई है, वह हकीकत में सराहनीय है। उन्होंने कचरा संग्रहण का काम जारी रखा। यही नहीं, आइसोलेशन सेंटर से निकलने वाले कचरे को भी स्वच्छता दीदियों ने संगृहीत कर डिस्पोज किया। अब भी इनका अभियान बिना रुके जारी है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नईदुनिया शहर की स्वच्छता दीदियों के हौसले को सलाम कर रहा है।
यह कहानी शहर की स्वच्छता क्षेत्रीय संघ समिति की उन महिलाओं की है, जिन्होंने शहर के कचरो को संगृहीत कर होने वाले मुनाफे से अपने जैसी कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया। समिति की अध्यक्ष लखोली निवासी जगेश्वरी लहरे, सचिव अनिता फ्रांसस और उपसचिव प्रेमा सोनकर ने स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर शहर में कचरा संग्रहण करने की ठानी। वर्ष 2015 में शुरुआत की। दो साल तक नफा-नुकसान के बिना काम किया। इनके काम को देखकर नगर निगम ने 2017 में शहर के जमात पारा में कचरा संगृहीत करने के लिए एसएलआरएम सेंटर बनाया, जहां गीला व सूखा कचरा को अलग कर कंपोस्ट किया जाता है। फिर इन महिलाओं ने समूह का गठन किया। प्रारंभ में इनके समूह में 12 महिलाएं थीं, आज इस समूह में 442 महिलाएं जुड़कर कचरे से आय अर्जित कर रही हैं।
कचरे से बना रहीं कंपोस्ट और वर्मी खाद : समिति की उप सचिव प्रेमा सोनकर ने बताया कि सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक हम महिलाएं कचरा एकत्रित करती हैं। लाकडाउन के दौरान होम आइसोलेशन से भी कचरा एकत्रित किया, जो काफी खतरनाक था, लेकिन समूह की महिलाओं ने कदम पीछे नहीं हटे। इस दौरान शहर में भी कचरा एकत्रित करने का अभियान जारी रहा। अंततः हमने जंग जीत ली। वर्तमान में ये महिलाएं शहर के 17 एसएलआरएम सेंटर में संगृहीत कचरे को पृथक कर गीले कचरे से कंपोस्ट तैयार करती हैं। वहीं गोबर खरीदी कर वर्मी खाद बना रही हैं।
हर माह दस
लाख रुपये की आय
समिति की अध्यक्ष जगेश्वरी लहरे व उप सचिव प्रेमा सोनकर ने कहा कि एक समय जिस कचरे को खुद घर के बाहर खुले में फेंकते थे, आज वही आय का स्रोत बन गया है। दो रुपये किलो में गोबर खरीदी कर वर्मी खाद बनाकर दस रुपये किलो में बेच रही हैं इससे समिति को हर माह दस लाख रुपये की आय हो रही है। इसे समिति के बैंक खाते में जमा किया जाता है। समिति की महिलाओं की परेशानी या आर्थिक क्षति होने पर समिति के खाते से मदद करते हैं।
