राजनांदगांव। शहर में आटो चालकों की मनमानी बढ़ती जा रही है। बिना यूनिक नंबर के आटो दौड़ रहे हैं। कुछ साल पहले यातायात विभाग ने आटो चालकों का रिकार्ड रखने के लिए उन्हें यूनिक नंबर दिया था। वर्तमान में अधिकतर आटो से यूनिक नंबर गायब हो चुके हैं। चालक यूनिक नंबर को दोबारा लिखवाने से कतरा रहे हैं। आटो चालक राहगीरों से तय किराया से अधिक ले रहे हैं। यातायात पुलिस ने सभी आटो चालकों को यूनिक नंबर लिखवाने व ड्रेस पहनने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक इसे गंभीरता से लागू नहीं कराया जा सका है। इसका फायदा आटो चालक उठा रहे हैं।
बैठा रहे क्षमता से अधिक सवारी : चालक अधिक रुपये कमाने के चक्कर में आटों में क्षमता से अधिक सवार बैठा रहे हैं। विभागीय कार्रवाई नहीं होने के कारण चालकों के हौसले बुलंद हैं। आए दिन आटो चालकों व यात्रियों के बीच किराए को लेकर विवाद होता है। चालक निर्धारित कीमत से अधिक किराया लेते हैं। रेलवे स्टेशन, भगत सिंह चौक, पोस्ट आफिस चौक, महावीर चौक, गुरुनानक चौक बस स्टैंड के पास आटो के रुकने के कुछ स्थान निर्धारित हैं, लेकिन चालक कहीं भी आटो को खड़ा कर देते हैं। इतना ही नहीं, सड़क पर चलते हुए अचानक मोड़ पर कट मार देते हैं, जिससे हादसे होते रहते हैं।
नए आटो चालकों का रिकार्ड नहीं : कुछ महीनों से शहर में आटो की संख्या बढ़ गई है। वर्तमान में 283 से अधिक आटो हैं, लेकिन यातायात विभाग के पास नए आटो चालकों का कोई रिकार्ड नहीं है। इधर, चालकों में सवारी बिठाने की होड़ मची रहती है। चालक सवारी को देखते ही आटो को रोक देते हैं।
बता दें कि यूनिक नंबर लिखे जाने से सबसे ज्यादा फायदा पुलिस को होगा। इससे चालकों का रिकार्ड भी पुलिस के पास रहेगा। यूनिक नंबर में मालिक और चालक दोनों का मोबाइल नंबर, गाड़ी का नंबर, पता अंकित रहता है।
वर्जन
समय-समय पर आटो चालकों का वेरीफिकेशन किया जाता है। यदि आटो से यूनिक नंबर मिट गए हैं तो दोबारा लिखाया जाएगा। -अमित सिंह, यातायात प्रभारी
