राजनांदगांव . राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डा. प्रियंका शुक्ला ने मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत मातृ मृत्यु अंकेक्षण (मैटरनल डेथ रिव्यू) की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की मृत्यु रोकने के लिये सभी अस्पतालों के लेबर रूम में हरसंभव आवश्यक व्यवस्था को करने कहा। प्रसव कराने वाले अधिक से अधिक स्टाफ नर्स एवं एएनएम को एसबीए प्रशिक्षण कराने के निर्देश दिए। गर्भवती महिलाओं का पंजीयन कर प्रसव पूर्व अनिवार्यतः उनका चार बार स्वास्थ्य परीक्षण (एएनसी) किया जाना सुनिश्चित करने को कहा ताकि प्रत्येक हाई रिस्क वाली गर्भवती महिला की पहचान कर उनके स्वास्थ्य की समुचित देखभाल कर स्वस्थ संस्थागत प्रसव कराया जा सके।
अनेक गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान विभिन्ना कारणों से हाई रिस्क की स्थिति में आ जाती हैं। ऐसी महिलाओं का विशेष ध्यान नहीं रखा जाए तो प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की जान का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में शामिल किया जाता है, जिनका वजन और ऊंचाई बहुत कम हो, हीमोग्लोबिन का स्तर 11 से कम हो, एनेमिक हो, जिनका रक्तचाप और शुगर का स्तर उच्च हो तथा जिनके पहले बच्चे का जन्म सिजेरियन आपरेशन से हुआ हो। ऐसी गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है, ताकि प्रसव के लिए पूर्व से आवश्यक तैयारी कर सुरक्षित प्रसव कराया जा सके।
वीसी में कहा गया कि सामान्यतः हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं के प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, सेप्सीस, हाईपरटेंशन आदि के कारण मृत्यु हो जाती है। इससे बचाव हेतु प्रत्येक मातृ मृत्यु का आडिट किया जाता है कि किन परिस्थितियों में प्रसव के दौरान मृत्यु हुई। इससे भविष्य में वैसी ही परिस्थिति में आवश्यक सावधानी बरत कर जच्चा-बच्चा की जान बचाई जा सके। डा. प्रियंका शुक्ला ने प्रत्येक मातृ मृत्यु का गंभीरता से मातृ मृत्यु अंकेक्षण किये जाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मिथलेश चौधरी ने जिला राजनांदगांव में मातृ एवं शिशु मृत्यु रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
