डोंगरगढ़। रोपवे हादसा के मामले में डोंगरगढ़ पुलिस ने मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष नारायण अग्रवाल, उपाध्यक्ष रघुवरदास अग्रवाल और मंत्री नवनीत तिवारी के खिलाफ लापरवाही व गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि रोपवे के संचालन में मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों ने लापरवाही की है। रोपवे संचालन के दौरान कोई भी प्रशिक्षित टेक्नीशियन नहीं था, फिर भी मनमानीपूर्वक रोपवे का संचालन कर रिस्क उठाया जा रहा था। ट्रस्ट के पदाधिकारियों की इसी मनमानी के चलते बीते 18 फरवरी को मटेरियल ढुलाई के दौरान एक ट्राली टूटकर नीचे खाई में गिर गई, जिसमें रोपवे के ही एक कर्मचारी की मौत हो गई। इस घटना के बाद मामले की जांच में भी मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारी अनदेखी कर रहे थे। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच की। जांच में मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों की मनमानी सामने आयी है, जिस पर उनके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।
बीते 18 फरवरी को मंदिर परिसर स्थित नए रोपवे में मटेरियल ढुलाई के दौरान एक ट्राली टूटकर खाई में गिर गई थी। ट्राली ऊपर मंदिर से नीचे आ रही थी, जिसमें रोपवे में काम करने वाला हेल्पर हरणसिंघी निवासी गोपीचंद गोड़ सवार था। ट्राली खाई में गिरने से उसकी मौत हो गई। हादसे के दौरान रोपवे में मालवाहक ट्राली लगी थी, जिसमें नीचे से ऊपर मंदिर में भवन निर्माण के लिए लोहे की राड भेजा जा रहा था, वहीं ऊपर से खाली ट्राली नीचे आ रही थी। उसी में हेल्पर गोपी बैठ गया था। इस हादसे के बाद रोपवे के संचालन में मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों पर ही उंगली उठी। हालांकि रोपवे संचालन के लिए कोलकाता की कंपनी सीआरएस से एक साल का एग्रीमेंट है, लेकिन नवंबर माह से ही रोपवे का संचालन मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारी ही कर रहे थे। कोलकाता से आई जांच टीमरोपवे हादसे के बाद कोलकाता की केनवल रोपवे कंपनी की टीम जांच के लिए डोंगरगढ़ पहुंच गई है। टीम में तीन सदस्य हैं, जो हादसे की जांच कर रहे हैं। बताया गया कि टीम सुबह ही डोंगरगढ़ पहुंची, जिसके तुरंत बाद जांच शुरू कर दी। एसडीएम अविनाश भोई ने बताया कि प्रशासनिक जांच भी चल रही है। रोपवे कंपनी की टीम को भी जांच रिपोर्ट देने कहा गया है। अभी तक उनकी जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। इस संबंध में डोंगरगढ़ थाना प्रभारी अलेक्जेंडर किरो ने कहा कि पुलिस की जांच में मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, जिसके कारण पदाधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करना गलत है। पुलिस ने गलत तरीके से प्रशासनिक दबाव में एफआइआर दर्ज किया है। रोपवे का संचालन कोलकाता की ही सीआरएस कंपनी कर रही है। बीते 25 जनवरी को कंपनी ने टेक्निकल कर्मचारी भी भेजा है। सालभर का एग्रीमेंट है। अभी हैंडओवर नहीं हुआ है। हमारे खिलाफ जुर्म दर्ज नहीं करना चाहिए था।
