आंदोलन के आड में चल रहा देश विरोधी खेल :
राजनांदगांव //हर आंदोलन सरकार को सबक देता है हर सत्ताधारी सरकार को कुछ न कुछ सिखने मिलता है,और उसका समाधान निकलता है। पूर्व पार्षद आभा तिवारी ने कहा की कांग्रेस आंदोलनो पर रोटी सेकती है। इस देश में वर्तमान में चल रहे दो आंदोलन ऐसे है न तो आंदोलनकारीयों को ठीक से पता है और न ही सरकार के पास कोई ठोस कदम है और यदि कडा कदम केन्द्र सरकार द्वारा उठया जाता है तो वह भी एक आंदोलन का रूप लेगी यह आंदोलनजीवी परजीवी की गिरोह है।कांग्रेस समाधान न करके समस्या पैदा करती है। इनका आंदोलन अमरबेल की तरह फैल रहा है । जबकी जनता ने अमरबेल की कई साखाऍ काट चुकी है । किन्तु बचे टहनी आंदोलन में अपनी जीवीका ढ़ुंढ़ रही है । सी.ए.ए. (नागरिकता संशोधन कानून) एवं किसान आंदोलन ये दोनो आंदोलनो ने देश को आग के हवाले करने की कोशिश की ।
जिला भाजपा मंत्री आभा तिवारी ने कहा की केन्द्र में भाजपा सरकार आने के बाद दिनॉक 9 फरवरी 2016 JNU मे विश्वविद्यालय परिसर में हुए एक कार्यक्रम में कथित तौर पर देश विराधी नारे लगे भारत तेरे टुकडे होगें इंशा अल्लाह… भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी…जैसे देशद्राही नारे लगे
यही कार्य सी.ए.ए. (नागरिकता संशोधन कानून)आंदोलन में हुआ और 26 जनवरी 2021 में किसान आंदोलन के नाम पर जो हुआ वह विश्व ने देखा। जनता को आंदोलन के पीछे की मंशा समझ आ गई। यह परजीवी नेता असल मे मोदी सरकार से डर गई है अपनी राजनीति जमीन बचाने और उसे चमकाने आंदोलन का आड लेती है। हद तो तब हो गई जब एफ डी आई लागु हो गया अर्थात विदेशी विनाशकारी विचारधारा(foreign destructive ideology) भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने संसद में कहा कि देश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की जरूरत है एफ डी आई को आसान भाषा में कहे तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश .. मगर नया एफ डी आइ(foreign destructive ideology) से बचने की जरूरत है। भारत अपनी लडाइ खुद लड लेगा विदेशी हस्तक्षेप की जरूरत नही। मगर कुछ छोटे दल जो कांग्रेस की गोद में बैठते है उनके ही रिमोट कन्ट्रोल में है। ऐसे नेताओ को भारत रत्न सचिन तेन्दुलकर एवं भारत रत्न लता मंगेशकर का भारत के पक्ष में लिखे गये टिवीट रास नही आते। ऐसे लोगो साजिश नजर आती है,और टुकडे टुकडे गेंग का समर्थन करते है। आभा तिवारी ने कहा कि क्या देश में किसान आंदोलन की आवाज उठाने के लिये नेताआ की कमी हो गई थी ,जो ग्रेटा, रिआना जैसे लोग करोडो के पैकेज लेकर आंदोलन का हिस्सा बनी देश द्रोही नेताओ ने सियासत चमकाने की कोशिश की । हमें ग्रेटा,रिआना जैसे किसानो की जरूरत नही है और न ही जनता और किसानो को डरने की जरूरत आज भी ओरिजिॅनल किसान खेत में काम कर रहे है।सूत्रो द्वारा मिली जानकारी के अनुसार कुछ छत्तीसगढ से बहिरूपीय किसान बन कर आंदोलन में गये।भेजनेवाला कौन है यह सब समझते है ।छत्तीसगढ की हालात तो सुधर नही रही है और अपने आकॉ को खुश करने जोडतोड की परिश्रम कर रहे है। सरकार क्या कर रही यह जनता से नही छुपा आज भी जहॉ भी जाओ भाजपा सरकार को याद करते है लोग । स्व हित के पहले राष्ट़हित सर्वोपरी है।आभा तिवारी
