राजनांदगांव। कोरोना की ही तरह क्षय रोग यानी टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए फेस मास्क बेहद कारगर उपाय है। फेस मास्क के इस्तेमाल को लेकर लोगों की जागरूकता को स्वास्थ्य से जुड़े संगठन लेंसेट की एक रिपोर्ट ने सकारात्मक कदम बताया है एवं टीबी की रोकथाम में इसे एक प्रभावशाली हथियार कहा है। रिपोर्ट के अनुसार यदि कोरोना काल के बाद बढ़े फेस मास्क के इस्तेमाल को अधिक बढ़ावा दिया जाए तो टीबी संक्रमण के प्रसार में कमी लायी जा सकती है। जिले में टीबी के रोगियों की खोज के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान लोगों को फेस मास्क अनिवार्य रूप से लगाने को लेकर जागरूक किया जा रहा है।टीबी विश्वभर में सबसे खतरनाक संक्रामक रोग है, जिससे प्रत्येक वर्ष कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। कोविड-19 के कारण वर्ष 2020 में जितनी मौतें हुई है, उससे लगभग पांच लाख से अधिक मौतें सिर्फ टीबी के कारण हुई है। वहीं, कोरोना महामारी ने टीबी देखभाल को काफी प्रभावित किया है, जिससे वर्ष 2025 तक टीबी के कारण विश्व भर में छह लाख से अधिक अतिरिक्त मौतें होने की आशंका है। यद्यपि, कोविड-19 महामारी ने फेस मास्क की उपयोगिता को साबित किया है। साथ ही फेस मास्क इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में भी काफी वृद्धि दर्ज हुई है।
टीबी संक्रमण से रोकथाम के लिए लोगों द्वारा फेस मास्क के इस्तेमाल करने में कई चुनौतियां रही हैं, जिसमें भ्रांति, कम पहुंच एवं मास्क पहनने में असुविधा जैसे कारण शामिल रहे हैं। एचआइवी-एड्स की रोकथाम के लिए कंडोम के इस्तेमाल में भी ऐसी ही चुनौतियां रही थी। यद्यपि, समय के साथ कंडोम इस्तेमाल में वृद्धि तो दर्ज हुई है, लेकिन टीबी रोकथाम के लिए मास्क का प्रचलन अभी भी ठहरा हुआ है। यहां तक कि टीबी ग्रसित मरीज भी फेस मास्क के इस्तेमाल के प्रति जागरूक नहीं है। फेस मास्क इस्तेमाल करने वाले लोग की पहचान समाज में एक रोगी के रूप में की जाती है।
