बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर का रूट रिले अंटरलाकिंग सिस्टम (आरआरआइ) केबिन में पैनल ठप हो गया है। जिसके कारण मुंबई-हावड़ा और कटनी मार्ग की सभी ट्रेनों प्रभावित है। छग एक्सप्रेस समेत दरभंगा, हाफा और उत्कल एक्सप्रेस शुक्रवार को लगभग एक से ढाई घंटे देरी से छूटी। रेलवे का दावा है कि पैनल को दुरूस्त करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। जल्द सबकुछ ठीक कर लिया जाएगा।
दोपहर ठीक 12 बजे के लगभग अचानक सिस्टम आउट आफ आर्डर हो गया। आनन फानन में ट्रेनों को रोकना पड़ा। सिग्नल सर्किट को सुधारने एक्स्पर्ट की टीम पहुंची। किंतु खबर लिखे जाने तक रेलवे को इसमें सफलता नहीं मिली है। सर्किट ठप होने की खबर के बाद रेलवे के आला अधिकारी सक्रिय हो गए। इंजीनियरिंग और तकनीकी विभाग की टीम भी पहुंची। मगर इस बीच दोपहर ढ़ाई बजे छूटने वाले छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ढ़ाई घंटे देरी से छूटी। इसी तरह हावड़ा पोरबंदर, उत्कल एक्सप्रेस भी एक से डेढ़ घंटे की देरी हुई। ट्रेनों के लेटलतीफी का सिलसिला निरंतर जारी है। माना जा रहा है कि इस सिस्टम का एक्सपायरी हो चुका था। वर्ष 2016 से अपग्रेड करने पत्राचार चल रहा था। वर्ष 1989 में इसकी स्थापना हुई थी। जिसकी अवधि 25 साल की होती है। रेलवे द्वारा इसे अपग्रेड करने में देरी के चलते यह स्थिति उत्पन्न् हुई है। क्या है आरआरआइ केबिन
इसका पूरा नाम रूट रिले अंटरलाकिंग सिस्टम (आरआरआइ) है। यह सिग्नल सिस्टम और ट्रेनों को नियंत्रण करता है। इसके जरिए केबिन में बैठकर कर्मचारी ट्रेनों की चाल और अदला बदली पर नजर रखते हैं। सिस्टम को सुधारने व अपग्रेड करने में रेलवे को लगभग 120 से 150 करोड़ तक खर्च करना पड़ सकता है। कोरोना महामारी के चलते अभी यात्री ट्रेनों का दबाव कम है। ऐसे में रेलवे की कोशिश होगी की जल्द से जल्द इसे दुरूस्त कर लिया जाए।
जून 2015 में पश्चिम मध्य रेलवे के इटारसी स्टेशन की आरआरआइ केबिन में हुई आगजनी की घटना ने ट्रेनों की चाल बिगाड़ दी थी। इसका असर बिलासपुर से छूटने वाली आधा दर्जन ट्रेनों में पड़ा था। आगजनी के बाद व्यवस्था सुधारने में कई दिन लग गए थे। जिसके कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। रेलवे को काफी नुकसान भी हुआ।
पुलकित सिंघल
सीनियर डीसीएम,दपूमरे बिलासपुर
