रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा पूर्व मंत्रियों और दिग्गज नेताओं की इंट्री के कारण लटक गया है। प्रदेश कार्यकारिणी के लिए कई पूर्व मंत्री पुत्र सक्रिय रूप से मैदान में है।
पूर्व मंत्री पुत्रों के नाम आगे आने से युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। चर्चा है कि भाजयुमो की कार्यकारिणी में नेता पुत्रों को जगह नहीं दी जा रही है। भाजपा के एक प्रभावशाली नेता के पुत्र को तो कोषाध्यक्ष बनाने पर तकरीबन सहमति बन भी गई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने भी इसके लिए सिफारिश की थी। इसके अलावा पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा के पुत्र लवकेश पैकरा, रामविचार नेताम की पुत्री, प्रेमप्रकाश पांडेय के पुत्र मनीष पांडेय और नारायण चंदेल सहित कई और नेताओं के बेटे-बेटियों को कार्यकारिणी में जगह दिलाने के लिए संघर्ष चल रहा है।
भाजपा की प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी ने साफ कर दिया है कि मैदान में जूझारू और सक्रिय नेताओं को ही कार्यकारिणी में जगह दी जाएगी। इसके साथ ही हाईकमान ने निर्देश दिए हैं कि 35 साल से अधिक उम्र वाले को किसी भी दशा में युवा मोर्चा का पदाधिकारी न बनाया जाए।
इसके चलते कुछ नेता पुत्र तो खुद ही दौड़ से बाहर हो गए। कुछ नेता पुत्र सक्रिय हैं और अपने इलाके में पकड़ भी रखते हैं। पिछले 15 साल की सत्ता में कई मंत्री पुत्र क्षेत्र की पूरी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। बावजूद इसके कई नेता पुत्रों का जोरदार विरोध हो रहा है।
केंद्रीय संगठन के पास कई नेता पुत्रों की शिकायत पहुंची है। इसमें दो नेता पुत्र ऐसे हैं, जिसके व्यवहार के कारण विधानसभा चुनाव में खुद मंत्री को हार का सामना करना पड़ा।
वरिष्ठ नेताओं के बेटों को भी जगह नहीं
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो केंद्रीय संगठन से निर्देश आया है कि किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी के बेटे-बेटियों को कार्यकारिणी में जगह न दी जाए। हालांकि अभी भी एक-दो नाम को एडजस्ट करने के लिए कोशिशें चल रही हैं। जूदेव परिवार के सदस्यों में से एक को प्रदेश कार्यकारिणी में प्रदेश मंत्री बनाया गया है। ऐसे में कुछ परिवार के नेताओं को पार्टी एडजेस्ट करने में कामयाब हो गई है।
