बिलासपुर। सेलर गोठान के औचक निरीक्षण पर पहुंचे कमिश्नर डा.एसके अलंग को स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा उत्पादित मशरूम इतना पंसद आया कि 500 स्र्पये देकर उन्होंने 500 ग्राम मशरूम खरीद लिया। समूह की महिलाओं ने बताया कि प्रतिदिन 15 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन और विक्रय कर रही है। कमिश्नर ने जागृति समूह द्वारा किए जा रहे मशरूम उत्पादन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अब तक मेरे द्वारा निरीक्षण किए गए सभी जिलों से बेहतर यहां मशरूम उत्पादन किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डा.सारांश मित्तर मौजूद थे। दोनों अधिकारियों ने स्व सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे मछली पालन, मुर्गी पालन, गोबर गैस प्लांट, बकरी पालन एवं बाड़ी विकास कार्यों का भी निरीक्षण किया।
संभागायुक्त डा. संजय अलंग एवं कलेक्टर डा. सरांश मित्तर ने बुधवार को बिल्हा विकासखंड के ग्राम सेलर के गौठान में कार्यरत विभिन्न् महिला स्व सहायता समूहों के सदस्यों से चर्चा कर व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने समूह की महिलाओं से गोबर खरीदी, वर्मी कंपोस्ट उत्पादन, विक्रय,पैकिंग आदि के बारे में पूछा। संभागायुक्त ने सेलर गोठान में संचालित गतिविधियों एवं जिले में वर्मी कंपोस्ट खाद के उत्पादन के लिए उपयोग में लाई जा रही अभिनव तकनीक की सराहना की। सेलर गोठान में 11 महिला स्वसहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया है। संभागायुक्त ने 35 एकड़ क्षेत्र में फैले इस गोठान में संचालित सभी गतिविधियों का निरीक्षण किया।शिव शक्ति स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा दोना पत्तल निर्माण का कार्य किया जा रहा है। संभागायुक्त ने उनसे प्रशिक्षण एवं अब तक अर्जित लाभ की जानकारी ली। ग्वालपाल महिला स्व सहायता समूह द्वारा उत्पादित वर्मी कंपोस्ट खाद का अवलोकन किया। समूह की महिलाओं ने डा. अलंग को बताया कि उनके द्वारा 27 क्विंटल वर्मी खाद का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 17 क्विंटल खाद की बिक्री हो चुकी है। कृषि विभाग के उप संचालक ने संभागायुक्त को जानकारी दी कि सेलर में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के लिए अभिनव तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। कम मूल्य लागत का वर्मी कंपोस्ट कम मूल्य की लागत से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाया जा रहा है। इस तकनीक के अंतर्गत वर्मी टैंक का पक्का स्ट्रक्चर न बनाकर जमीन की सतह पर एक से डेढ़ फीट की उंचाई पर पालिथिन बिछाकर वर्मी कंपोस्ट खाद बनाया जाता है। इसमें बीच का भाग ऊपर होता है एवं किनारों में ढाल होती, जिससे अतिरिक्त पानी निकल जाता है।डी-कंपोजर का उपयोग वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए डी-कंपोजर का उपयोग किया जा रहा है। इससें कम समय में ही खाद बनकर तैयार हो जाती है और यह खाद की उपलब्धता को बढ़ाता है। वर्मी टांके में कुछ मात्रा में डी-कंपोजर मिलाने से यह जल्द ही गोबर एवं अन्य सामग्री को डी-कंपोज करता है, जिससे खाद जल्द तैयार हो जाता है।
प्रोम खाद का उपयोग
जिले में प्रोम खाद का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक में खाद में राक फास्फेट मिलाया जाता है। जिससे भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ती है एवं यह जैविक होता है। रासायनिक खाद की अपेक्षा आधी मात्रा ही जैविक खाद की लगती है।






