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CG : अग्निकांड,150 करोड़ के चार हजार ट्रांसफार्मर कबाड़ बीमा नहीं इसलिए विभाग का बड़ा नुकसान

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बिजली कंपनी के स्टोर के भीषण अग्निकांड में 4 हजार ट्रांसफार्मर जलने से पावर कंपनी को डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। ट्रांसफार्मर के अलावा केबल, मीटर और अन्य उपकरण भी जलकर खाक हो गए। भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ कि बिजली कंपनी के इस स्टोर में जहां करोड़ों के ट्रांसफार्मार खुले में रखे थे कंपनी ने एक का भी बीमा ही नहीं कराया था, जबकि बीमा कराने का नियम है।

ट्रांसफार्मर जलने के कारण जो नुकसान हुआ है उसे बिजली कंपनी को वहन करना पड़ेगा। इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा। क्योंकि बिजली कंपनी ​​नई दरें अपने फायदे ​नुकसान के अनुसार तय करती हैं। यानी आने वाले दिनों में बिजली की दरों पर नुकसान का असर पड़ सकता है। जबकि इसमें पूरी तरह से बिजली कंपनी के अफसरों की लापरवाही है। आमतौर पर सरकारी और निजी संस्थानों के स्टोर या गोदाम की बीमा पाॅलिसी कराई जाती है, ताकि इसी तरह की आगजनी या चोरी इत्यादि होने पर बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति ली जा सके। यहां कंपनी के खरीदी और भंडार विभाग ने ऐसा नहीं किया है।

हालांकि ट्रांसफार्मर के भीतर आयल होता है। यह काफी ज्वलनशील होता है। इसलिए गर्मी के दिनों में अक्सर ट्रांसफार्मर में आग लगने का खतरा रहता है। स्टोर में एक साथ हजारों की संख्या में ट्रांसफार्मर रखे जाते हैं। िबजली कंपनी के गुढ़ियारी-कोटा स्टोर में बड़े-बड़े ट्रांसफार्मरों के अलावा बड़े-बड़े ड्रम में ऑयल भी रखा था।

आॅयल की वजह से ही पूरे स्टोर में भयंकर आग लगी। इतनी ज्वलनशील चीजें होने पर नियमत: स्टोर का फायर इंश्योरेंस कराना चाहिए था। लेकिन कंपनी ने स्टोर या ट्रांसफार्मर का इंश्योरेंस नहीं कराया था। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक डेढ़ सौ करोड़ का नुकसान बताया जा रहा है। जांच कमेटी खरीदी और सप्लाई की जानकारी के आधार पर हुए नुकसान का वास्तविक आंकलन कर रही है। इसमें नुकसान के आंकड़े बढ़ने का अनुमान है। इस स्थिति में पूरा का पूरा नुकसान बिजली कंपनी को ही उठाना पड़ेगा।

1​0 साल भी पहले भी लगी थी भीषण आग
10 साल पहले भी बिजली कंपनी के इसी स्टोर में इसी तरह की आगजनी हुई थी। उस समय भी करोड़ों रुपए के ट्रांसफार्मर जल गए थे। सूत्रों ने बताया कि उस समय जांच में भी कई तरह की खामियां सामने आईं थीं। तब कुछ खामियों को दूर किया गया था, लेकिन आगजनी की संभावना और उससे होने वाले नुकसान को लेकर किसी तरह की सावधानी नहीं बरती गई। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद भी कंपनी ने स्टोर के इंश्योरेंस का कोई प्लान तैयार नहीं किया।

बिजली कंपनी अपने नुकसान की भरपाई के लिए ही बढ़ाती है टैरिफ
ट्रांसफार्मर जलने की वजह से बिजली कंपनी को जो नुकसान हुआ है, उसका भार अंतत: उपभोक्ताओं ही पड़ेगा। बिजली कंपनी हर साल टैरिफ रिवाइज करने के लिए एक प्रस्ताव राज्य विद्युत विनियामक आयोग को प्रस्तुत करती है। बिजली कंपनी आने वाले वर्ष के लिए अनुमानित आय और खर्च तथा नुकसान के आधार पर टैरिफ में वृद्धि की मांग करती है। कंपनी आय में पिछले वर्षों के नुकसान को भी समायोजित करने के बाद बचे हुए नुकसान की भरपाई के लिए ट्रैरिफ बढ़ाने की मांग करती है। ट्रांसफार्मर जलने से डेढ़ से दो सौ करोड़ का नुकसान यदि बिजली कंपनी को होगा तो कभी ना कभी उसका भार उपभोक्ताओं को ही पड़ेगा।

बीमा कराया होता तो साजिश के एंगल पर भी की जाती जांच
स्टोर में आगजनी की जांच के लिए पावर कंपनी ने छह अधिकारियों की कमेटी बनाई है। जांच कमेटी में सभी अधिकारी बिजली कंपनी के हैं। इसमें आग लगने के कारण और जिम्मेदार अधिकारियों की तलाश करना भी शामिल है। कमेटी को 7 दिन में रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं इस ​वजह से रिपोर्ट पेश नहीं की गई। बीमा कंपनी से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसी स्टोर या उसमें रखे हुए सामान का बीमा कराया जाता है और वह जल जाता है। तो बीमा कंपनी थर्ड पार्टी जांच कराती है। ऐसी स्थिति में यह भी पता लगाया जाता है कि दुर्घटना प्राकृतिक कारणों से लगी है या इसके पीछे कोई साजिश है।

गर्मी में आग की ज्यादा संभावना, तीन-चार माह के लिए करा सकते हैं बीमा
पावर कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि काफी खर्चीला होने के कारण ही स्टोर एंड परचेज डिपार्टमेंट ने ट्रांसफार्मर स्टोर का बीमा नहीं कराया। बिजली कंपनी लगातार ट्रांसफार्मरों की खरीदी करती है। ट्रांसफार्मर खराब होने या बदलने की जरूरत होने पर स्टोर से उसकी सप्लाई भी होती है।

इस वजह से स्टोर में हर समय डेढ़ से दो सौ करोड़ के तीन से चार हजार ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरण रखे रहते हैं। इतनी लागत के उपकरण होने पर उनका बीमा करवाने में लाखों खर्च होते हैं। इसी खर्च से बचने के लिए कंपनी कभी भी बीमा नहीं कराती। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसफार्मर में आगजनी की ज्यादातर संभावना गर्मी के दिनों में होती है। इसलिए गर्मी के तीन-चार महीने के लिए बीमा कराया जा सकता है।

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