बिलासपुर जिले में पुरातात्विक धरोहर की किस कदर उपेक्षा हो रही है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस संग्रहालय की बिल्डिंग उधार में ली गई है। उसकी छत कभी भी ढह सकती है। यदि ऐसा हुआ तो छठवीं से लेकर तेरहवीं सदी की प्राचीन मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो जाएंगी। ये हाल जिला पुरातत्व संग्रहालय का है। यानी संग्रहालय में भी मूर्तियां यदि सुरक्षित नहीं रहेंगी तो कहां रहेंगी?
दरअसल, जिला पुरातत्व संग्रहालय नगर निगम के टाउनहाल बिल़्डिंग के एक कमरे में स्थित है। टाउनहाल बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है, इसलिए बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड हेरिटेज बिल्डिंग के रूप में इसका जीर्णोद्धार करा रही है। संग्रहालय के हिस्से को छोड़कर तकरीबन पूरी बिल्डिंग की नई छत ढाली जा चुकी है।

संग्रहालय के हिस्से को इसलिए छोड़ दिया गया है कि मूर्तियों को शिफ्ट किए बिना उस हिस्से में निर्माण किया गया तो मूर्तियों को खतरा हो सकता है। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार का कहना है कि पुरातत्व विभाग के एक्सर्ट इन मूर्तियों को सुरक्षा के साथ दूसरी जगह शिफ्ट करेंगे। इसके लिए विभाग से लगातार बातचीत चल रही है।

डायरेक्टर के दौरे का नतीजा शून्य
जिला पुरातत्व संग्रहालय के प्रभारी बीएल ध्रुव का कहना है कि संग्रहालय दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट करने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। विभाग के डायरेक्टर स्वयं बिलासपुर का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पुराने कमिश्नर कार्यालय में अरपा बेसिन विकास प्राधिकरण के कार्यालय के पीछे पर्याप्त स्थान है। प्रशासन यदि इस पर संज्ञान लेकर स्थान उपलब्ध कराए तो संग्रहालय की सभी मूर्तियों को शिफ्ट किया जा सकता है।
संग्रहालय में सुरक्षित नहीं ये मूर्तियां
जिला पुरातत्व संग्रहालय में छठवीं शताब्दी से लेकर तेरहवीं और चौदहवीं शताब्दी की प्राचीन मूर्तियां रखीं है, जिनसे इतिहास, संस्कृति और उत्कृष्ट कला कौशल का पता चलता है। दूसरे राज्यों से जिला मुख्यालय आने वाले लोग संग्रहालय की प्राचीन मूर्तियों के अवलोकन से सिर्फ इसलिए वंचित हैं, क्योंकि अफसर उसे सही जगह पर शिफ्ट करने के मामले में उदासीन हैं।
आरोप है कि संग्रहालय साल भर से बंद है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार संग्रहालय में छठवीं से लेकर तेरहवीं शताब्दी तक की 113 प्रतिमाएं रखी गई हैं। इनमें जिले के कई स्थानों से प्राप्त प्रतिमाएं शामिल हैं।
- तालागांव से मिली चौंथी शताब्दी की कुबेर की प्रतिमा व स्तंभ।
- मदनपुर गढ़ से प्राप्त 11वीं शताब्दी की गंगा की प्रतिमा ।
- रतनपुर से प्राप्त 11 वीं शताब्दी के भगवान आदिनाथ, नदी देवी की प्रतिमा।
- दार सागर में मिली 11 वीं शताब्दी की अंबिका,गोमेद, कौमारी की प्रतिमाएं।
- गनियारी से मिली 12 वीं शताब्दी की मां पार्वती व सूर्य देव की प्रतिमाएं।
- 13 वीं शताब्दी के अंतर्गत मदनपुर गढ़ की शिव, यमुना व शैव द्वारपाल की प्रतिमाएं।
