छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए राज्य शासन नॉइस मीटर का इस्तेमाल करेगी। इस डिवाइस से डीजे और तेज आवाज वाले उपकरणों की जांच की जाएगी। जिससे पता चल सकेगा कि कितनी तीव्रता से बजाई जा रही है। अभी तक 50 से 60 डेसीबल ध्वनि पर बजाने की अनुमति है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने तेज आवाज में बजने वाले DJ और साउंड सिस्टम पर ऐतराज जताते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य शासन के मुख्य सचिव से शपथ पत्र में जवाब मांगा था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण रोकने का आदेश दिया है।
जिसका पालन करने के लिए शासन स्तर पर क्या प्रयास किए गए हैं ? इसके अलावा छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति ने भी जनहित याचिका के साथ हस्तक्षेप याचिका दायर की है। जिसमें बताया कि शासन ने 4 नवंबर 2019 को हर साउंड सिस्टम और पब्लिक एड्रेस सिस्टम में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए साउंड लिमिटर लगाना अनिवार्य किया है।

नियमों का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से मांगा है शपथपत्र।
बिना जांच के साउंड सिस्टम बजाना गलत है
अधिसूचना के अनुसार कोई भी निर्माता, व्यापारी, दुकानदार, एजेंसी, ध्वनि सिस्टम या पब्लिक एड्रेस सिस्टम को बिना साउंड लिमिटेड (ध्वनि सीमक) के विक्रय, क्रय, उपयोग या इंस्टाल नहीं कर सकता और न ही किराए पर दे सकता है।
पुलिस अधिकारी, नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत, पंचायत यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी सरकारी या गैर सरकारी कार्यक्रम में ध्वनि अवरोधक लगाए बिना कोई भी साउंड सिस्टम नहीं लगाया जाएगा या किराए पर नहीं दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से मांगा है शपथपत्र
शासन की अधिसूचना देखने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा था कि नियम कागजों तक सीमित है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से शपथ पत्र मांगा है कि इस अधिसूचना का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। इस केस की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
ध्वनि प्रदूषण रोकने सभी जिलों को मिले नाइस मीटर
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य शासन ने ध्वनि प्रदूषण पर रोकने सभी जिलों को नॉइस मीटर दिया है। इसे संबंधित थानों में उपलब्ध कराया गया है। इस डिवाइस के माध्यम से पुलिस आसानी से जान सकेगी कि किसी भी आयोजन में बजने वाला साउंड सिस्टम कितनी आवाज में बज रहा है। तय पैमाने से अधिक आवाज होने पर मीटर तत्काल बताएगा और कार्रवाई करने में आसानी भी होगी।
क्या होता है साउंड लिमिटर ?
साउंड लिमिटर एक प्रकार का छोटा सा उपकरण होता है, जो कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों के एम्पलीफायर में लगाया जाता है। इसे लगाने के बाद निर्धारित डेसीबल से ज्यादा ध्वनि निकलने पर ध्वनि विस्तारक यंत्र अपने आप बंद हो जाता है।
वहीं कुछ साउंड लिमिटर ऐसे आते हैं कि साउंड सिस्टम बंद हुआ, तो 60 मिनट तक दोबारा चालू नहीं होंगे। लेकिन, किसी भी DJ और साउंड सिस्टम संचालक के एम्पलीफायर में यह डिवाइस नहीं लगाया जा रहा है। इसलिए हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई है।

ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने उपकरण लेकर निकलेगी पुलिस।
सरकारी, राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में ढीली पड़ती है पुलिस
सरकारी आयोजनों के साथ ही राजनीतिक, सामाजिक और शादियों के सीजन में रसूख के आगे पुलिस की कार्रवाई ढीली पड़ जाती है। नियम उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस पर सवाल भी उठता है।
अब जानिए नॉइस मीटर का होगा उपयोग
नॉइस मीटर डेसीबल एक इकाई मापने का उपकरण है। इसका उपयोग शोर या ध्वनि की तीव्रता को मापने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कम श्वास से उत्पन्न ध्वनि की माप करीब 20 डेसीबेल (ए) हो सकती है।
एक आकलन में यह पाया गया है कि मनुष्य का श्रवण तंत्र- कान लगभग 40-50 डेसीबेल (ए) की तीव्रता वाली ध्वनि को आसानी से सहन कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 45 डेसीबेल (ए) की ध्वनि को कर्णप्रिय और मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित बताया है। कोलाहल अधिनियम के तहत 50 से 60 डेसीबल ध्वनि के उपयोग की अनुमति है।

प्रतिबंध के बाद भी बेधड़क बज रहे DJ और साउंड सिस्टम।
कोलाहल अधिनियम में जुर्माने का है प्रावधान ?
अधिसूचना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत जारी की गई है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत बने नियमों का उल्लंघन करने पर 5 साल की सजा या 1 लाख का फाइन या दोनों लगाया जा सकता है। अगर नियमों का उल्लंघन जारी रहता है, तो प्रतिदिन रुपए 5000 का फाइन और लगाया जा सकता है।
