आगरा – फर्जी वेबसाइट और फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर लोगों से 10 साल में 250 करोड़ की ठगी करने वाले नाइजीरियन गैंग ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से 40 खाते खुलवाए थे। रेंज साइबर सेल की जांच में यह सामने आया है। यह सभी निजी बैंकों में खोले गए थे। एक साल पहले गुजरात में लोगों से धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने 15 खातों को होल्ड भी कराया था, लेकिन खातों में फर्जी दस्तावेज लगाए जाने के कारण पुलिस गैंग को नहीं पकड़ सकी। आगरा रेंज साइबर सेल की टीम ने बुधवार को नाईजीरियन गैंग के सदस्य गुड्स टाइम संडे उर्फ बेंशन, गाजियाबाद निवासी तरुण यादव, संभल निवासी आसिफ और जसपाल को गिरफ्तार किया था। गुड्स टाइम संडे सहित अन्य के पास से पुलिस ने 75 बैंक पासबुक बरामद की थीं। इन पासबुक में करोड़ों के लेन-देन की जानकारी है। अब पुलिस इन बैंकों से खातों को होल्ड कराकर पिछले सालों में हुए लेन-देन के बारे में पड़ताल करने में लगी है। एक आरोपी की 15 आईडी पुलिस को मिली थी। इनकी मदद से आरोपी ने खाते खुलवाए थे। गैंग के सरगना सहित अन्य आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है।
रेंज साइबर सेल के मुताबिक, गैंग ने खाते उत्तर प्रदेश के संभल, मुरादाबाद, गोरखपुर और बिहार के जिलों की बैंकों में खोले थे। इन जिलों की ही पासबुक पुलिस को मिली हैं। बैंकों में भी भारतीय स्टेट बैंक के अलावा देना बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, आईडीबीआई आदि बैंक शामिल हैं। इनमें से 40 खातों के फर्जी दस्तावेज से खोले जाने की जानकरी मिली है। इस वजह से ही धोखाधड़ी होने के बाद पुलिस गैंग को नहीं पकड़ पा रही थी।
रेंज साइबर सेल के मुताबिक, गुजरात में लाखों की धोखाधड़ी के मामले में वहां की साइबर सेल जांच में लगी थी। तब 15 खातों की जानकारी साइबर सेल को लगी थी। इनमें रकम जमा की गई थी। पुलिस ने बैंकों से संपर्क करके खातों को होल्ड करा दिया था। इन खातों में फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे। किसी में पहचानपत्र तो किसी में पते का प्रमाणपत्र गलत था। इस कारण पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी थी। गिरफ्त में आए आरोपियों ने बताया कि पूर्व में एक राज्य की पुलिस ने पकड़ भी लिया था। मगर, कोई साक्ष्य नहीं थे। इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की थी। इस पर सदस्यों को छोड़ दिया गया।
